चार माह तक गूंजेंगे धर्म-ज्ञान के प्रवचन

भक्ति और उल्लास के बीच हुआ चातुर्मास कलश स्थापना समारोह

जसवंतनगर,इटावा। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में रविवार सायंकाल परम पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर महाराज के चातुर्मास वर्षायोग का कलश स्थापना समारोह श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार,ध्वजारोहण और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच जैन समाज के श्रद्धालुओं ने कलश स्थापित कर गुरुदेव से आगामी चार माह तक नगर में धर्म,ज्ञान और अध्यात्म की अनवरत गंगा प्रवाहित करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं ध्वजारोहण से हुआ। महेशचंद जैन,पंकज जैन और नीरज जैन ने ध्वज फहराया,जबकि आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज के चित्र का अनावरण भट्टारक सौरभ सेन जी ने किया। विनोद जैन एवं विनीत जैन परिवार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। इसके बाद अनीता जैन एवं रजत जैन परिवार (लुधुपुरा) ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया। लीलावती, कुमदेश,विनोद और मनोज परिवार ने भोजन व्यवस्था में सहयोग देकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

समारोह के दौरान बच्चों ने मंगल गीतों पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं,जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। चातुर्मास के प्रथम कलश की स्थापना का सौभाग्य नलिन, अनिल एवं नितिन जैन को मिला। द्वितीय कलश रोहित जैन ‘फड्डू’, तृतीय मनोज प्रखर जैन,चतुर्थ आशीष जैन तथा पंचम कलश राजकमल जैन ने स्थापित किया। गुरुदेव को नवीन पिच्छी अर्पित करने का सौभाग्य अतुल गुप्ता ‘लाला भट्टा’ को प्राप्त हुआ,जिन्होंने भक्तिभाव से नृत्य करते हुए पिच्छी समर्पित की।

अहमदाबाद से आईं उषा दीदी ने मुनि श्री भावसागर महाराज को सरल,विद्वान और योगी संत बताते हुए कहा कि उनका आगम आधारित स्वाध्याय और जैन सिद्धांतों की गहन व्याख्या समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।

अपने प्रवचन में मुनि श्री 108 भावसागर महाराज ने कहा कि वह यहां मंदिर या धर्मशाला का निर्माण कराने नहीं,बल्कि जैन समाज को एकजुट करने और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का संदेश देने आए हैं। उन्होंने कहा कि धर्म,स्वाध्याय और आत्मचिंतन से ही जीवन का वास्तविक कल्याण संभव है।

चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन कलशों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना होगी तथा वर्षायोग पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु इन्हें अपने घरों में स्थापित करेंगे। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि चार माह तक चलने वाले प्रवचन,स्वाध्याय और धार्मिक आयोजनों से नगर का आध्यात्मिक वातावरण और अधिक समृद्ध होगा।

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