कैग की रिपोर्ट से इस राज्य में बड़ा खुलासा, मरी हुई गायों के नाम पर उठाई 57 करोड़ की सब्सिडी

Gaushala subsidy scam 2026: राजस्थान में गायों के संरक्षण के लिए सरकारी सब्सिडी से जुड़ी भारी वित्तीय गड़बड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। CAG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की रिपोर्ट के बाद, राज्य सरकार ने सात गौशालाओं से लगभग ₹16 करोड़ वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन गौशालाओं पर आरोप है कि उन्होंने सब्सिडी पाने के लिए जानवरों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई और मर चुकी गायों के नाम पर आए फंड का गलत इस्तेमाल किया।

CAG की जांच में राज्य की अलग-अलग गौशालाओं के रिकॉर्ड और ‘भारत पशुधन’ ऐप के डेटा के बीच बड़ी गड़बड़ियां पाई गईं। पता चला कि कई मामलों में, गौशालाओं ने चारे और पानी के लिए सरकारी सब्सिडी पाने के लिए जानवरों की संख्या असल संख्या से ज़्यादा बताई। रिपोर्ट में ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें उन जानवरों के नाम पर सब्सिडी ली जाती रही जो पहले ही मर चुके थे। इन गड़बड़ियों में जालोर जिले के पथमेड़ा स्थित श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला जैसी प्रमुख गौशालाएं भी शामिल हैं।

CAG रिपोर्ट के बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई

खास बात यह है कि CAG ने पाया कि राज्य की 38 गौशालाओं में जानवरों की संख्या लगभग 1.31 लाख ज़्यादा बताकर ₹57.36 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी दी गई। अब चरणों में वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इनमें से सात गौशालाओं से लगभग ₹16 करोड़ वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं। पशुपालन विभाग ने संबंधित गौशालाओं को नोटिस भेजकर तय समय में रकम जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि ऐसा न करने पर भविष्य में मिलने वाली वित्तीय सब्सिडी और प्रशासनिक मंज़ूरी रोकी जा सकती है।

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वहीं, संबंधित गौशालाओं के संचालकों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि ये दिक्कतें जानबूझकर की गई धोखाधड़ी के बजाय कागज़ात और रिकॉर्ड में तकनीकी खामियों की वजह से हुई हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले की सुनवाई अभी एक जांच समिति के सामने चल रही है। इस घटना ने राजस्थान में गाय संरक्षण योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी फंड के इस्तेमाल की निगरानी करने वाले सिस्टम पर भी सवाल उठ रहे हैं और ऐसी संभावना है कि आने वाले समय में और गौशालाओं के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

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