जस्टिस स्वामीनाथन vs. इंडिया गठबंधन: मद्रास HC के आदेश पर तमिलनाडु से दिल्ली तक सियासी संग्राम

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन एकाएक सुर्खियों में हैं। तमिलनाडु सरकार के बाद इंडिया गठबंधन ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में तमिलनाडु से नई दिल्ली तक सियासी हलचल बढ़ चुकी है। सोशल मीडिया पर जस्टिस स्वामीनाथन के समर्थन और विरोध के स्वर दिखाई देने लगे हैं। सियासत गर्मान के प्रबल आसार हैं।

जस्टिस स्वामीनाथन के एक आदेश को लेकर यह पूरा विवाद उभरा है। तमिलनाडु में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर है। 6वीं सदी का यह मंदिर बेहद लोकप्रिय है। मंदिर के प्रति भक्तों की अटूट आस्था है। जस्टिस स्वामीनाथन ने मंदिर के दीपाथून (पिलर) पर दीया जलाने की परंपरा को पुन: शुरू करने का निर्देश दिया है। इस पिलर के समीप सिकंदर बादुशाह की दरगाह है। दरगाह की स्थापना तेरहवीं सदी सदी में की गई थी। मंदिर कमेटी द्वारा कोर्ट के आदेश न पालन न किए जाने पर जस्टिस स्वामीनाथन ने मंदिर प्रबंधन को कंटेम्प्ट ऑर्डर जारी कर दिया।

यदि आप वेदों की रक्षा करते हैं, तो वेद आपकी रक्षा करते हैं

इसके अलावा भक्तों को खुद दीया जलाने की अनुमति प्रदान कर दी गई। इसके बाद तमिलनाडु की डीएमके सरकार भड़क गई। सरकार ने कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे डाली है। इस बीच यह मामला कानूनी से सियासी भी हो चला है। इंडिया गठबंधन के सौ से अधिक सांसदों ने जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए नोटिस दिया है। इसके पहले जस्टिस स्वामीनाथन अपनी उस टिप्पणी पर सुर्खियों में रहे थे, जिसमें कहा गया कि ‘यदि आप वेदों की रक्षा करते हैं, तो वेद आपकी रक्षा करते हैं’।

देश के न्यायिक जगत में जस्टिस स्वामीनाथन जाना पहचाना नाम हैं। उनके रिटायरमेंट में अभी लगभग पांच साल का समय शेष है। महाभियोग चलने पर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। वैसे सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर और दरगाह दोनों की प्रबंध कमेटी के सदस्य पिलर पर दीपक जलाने की परंपरा आरंभ होने से संतुष्ट थे, मगर जिलाधिकारी ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका जाहिर कर वहां दीपक जलाने पर रोक लगा दी। सवाल यह कि दीपक जलने से किसे आपत्ति हो सकती है?

क्यों बढ़ा विवाद

दरअसल तमिलनाडु में भाजपा और डीएमके की आपसी लड़ाई के कारण इस विवाद को सियासी तूल दिया जा रहा है। सपा मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी बाड्रा जैसी राजनीतिक शख्सियत को मंदिर में दीपक जलाए जाने पर आपत्ति है। चूंकि अखिलेश और प्रियंका इंडिया गठबंधन के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे, जिसने जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा।

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ज्ञापन में कहा गया कि मंदिर में दीपक जलाने की अनुमति देने से सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा उत्पन्न हो सकता है। जस्टिस स्वामीनाथन के फैसले के समर्थन में आगे आए नागरिकों ने अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी पर तंज कसने में देरी नहीं की है। कुछ व्यक्तियों का कहना है कि इन नेताओं ने कभी हिंदू मंदिरों के समर्थन में इस प्रकार की सक्रियता नहीं दिखाई है।

कुल मिलाकर यह मामला आसानी से शांत होने वाला नहीं है। तमिलनाडु में यह मुद्दा चर्चाओं में है। वहां की राजनीति पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल जस्टिस स्वामीनाथन के निर्णय पर नई दिल्ली से लेकर तमिलनाडु तक अलग-अलग राय रखने वालों की संख्या बढ़ रही है।

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