विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच का विकास करना अध्यापक का प्रमुख दायित्व है- डॉ भारती सिंह

विज्ञान दिवस पर “भविष्य का भारत और विज्ञान की भूमिका" विषयक संगोष्ठी

सुल्तानपुर। राणा प्रताप पी जी कॉलेज के बी.एड. विभाग द्वारा राष्ट्रीय ” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. संतोष कुमार सिंह ‘अंश’ ने कहा कि इस वर्ष की थीम “विकसित भारत में महिलाओं का वैज्ञानिक योगदान” अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की वैज्ञानिक, तकनीकी और शैक्षिक भागीदारी को सशक्त बनाना आवश्यक है।

विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर, प्रोत्साहन और नेतृत्व प्रदान कर ही आत्मनिर्भर एवं समृद्ध भारत का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।विज्ञान को मानवीय मूल्यों से प्रेरित होना चाहिए। असिस्टेंट प्रोफेसर शांतिलता कुमारी ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें नए आयामों की ओर अग्रसर होते हुए विज्ञान का उपयोग मानव कल्याण के लिए करना होगा। उन्होंने बल देते हुए कहा कि धरती और पर्यावरण के संरक्षण हेतु वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं।

डॉ. सीमा सिंह ने कहा कि हमारी वैज्ञानिक सोच और कर्म लोककल्याण की भावना से युक्त होने चाहिए। विज्ञान का विकास आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों के साथ हो, तभी वह समाज के लिए सार्थक सिद्ध होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। विभागाध्यक्ष डॉ. भारती सिंह ने कहा कि विज्ञान की प्रत्येक खोज सकारात्मक और रचनात्मक होनी चाहिए। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच का विकास करना अध्यापक का प्रमुख दायित्व है।

उन्होंने कहा कि जिज्ञासा, तर्क और प्रयोगशीलता ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आधारशिला हैं। संगोष्ठी में अभिषेक कुमार, बृजेश कुमार, वर्षा यादव, बॉबी तिवारी, पुष्पा निषाद, राहुल निषाद, कुँवर कमल कांत एवं स्वेता मौर्या ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन वर्षा यादव ने किया।

Related Articles

Back to top button