असम में BJP की ‘हैट्रिक’ की तैयारी, नितिन नवीन का वो लक्ष्य जिससे विपक्ष के उड़ गए होश

Assam Politics 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा का 50% वोट हासिल करने का लक्ष्य और कांग्रेस की आंतरिक समस्याओं की चर्चा, गठबंधन में मतभेद और चुनावी रणनीतियों पर विशेष ध्यान।

Assam Politics 2026: असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के लिए ये चुनाव अपनी स्थिति मजबूत करने और असम में सत्ता की हैट्रिक बनाने का मौका है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं के सामने एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा है – विधानसभा चुनाव में 50% वोट हासिल करना। अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो विपक्ष की स्थिति बेहद कमजोर हो जाएगी और वो महज 20-28 सीटों तक सिमट कर रह जाएगा।

हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता बरकरार

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की छवि राज्य में अभी भी मजबूत बनी हुई है। उनकी कार्यशैली और नेतृत्व ने भाजपा को असम में एक स्थिर आधार दिया है। भाजपा का प्रयास है कि इस चुनाव में वे न सिर्फ सत्ता बरकरार रखें, बल्कि अपने वोट शेयर को भी काफी बढ़ा लें।

कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण हालात

वहीं, कांग्रेस के लिए असम विधानसभा में संघर्ष आसान नहीं होने वाला। भूपेन बोरा के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। इसके अलावा महाजोत के भीतर भी मतभेद साफ नजर आ रहे हैं, खासकर सीटों के बंटवारे को लेकर। महाजोत के घटक दलों का दबाव बढ़ता जा रहा है, और हर पार्टी अधिक से अधिक सीटें चाहती है। ऐसे में कांग्रेस को इस उलझन से बाहर निकलने में कठिनाई हो सकती है।

महाजोत के भीतर असंतोष

कांग्रेस के लिए महाजोत में सीटों का बंटवारा एक और बड़ी चुनौती बन चुका है। 2021 में महाजोत के घटक दलों में कई बदलाव हुए हैं, जिससे गठबंधन की स्थिति पहले जैसी नहीं रही। एआईयूडीएफ और बीपीएफ ने महाजोत से अलग होकर अलग राह अपनाई है। वहीं, असम जातीय परिषद और रायजोर दल महाजोत में शामिल हो गए हैं, मगर इन दलों के साथ भी सीटों को लेकर तकरार जारी है। कांग्रेस के लिए मुश्किल यह है कि यदि वह इन्हें ज्यादा सीटें देती है तो खुद को नुकसान उठाना पड़ेगा।

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कांग्रेस को गठबंधन के बिना मुश्किलें

अगर कांग्रेस ने अन्य दलों के साथ गठबंधन नहीं किया, तो भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को हराना उसके लिए आसान नहीं होगा। असम में इस वक्त भाजपा एक मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और कांग्रेस को अगर सत्ता में वापसी करनी है तो उसे अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदलने की आवश्यकता होगी।

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