कहीं फिर से ‘कोरोना काल’ जैसे हालात तो नहीं? मशहूर हस्ती बोली- सबसे बुरे वक्त के लिए रहें तैयार

साल भर तक सोने (गोल्ड) की खरीदारी न करें, पेट्रोल-डीजल का खर्च घटाएं, विदेश यात्राओं से परहेज करें, विदेशी की बजाए स्वदेशी सामान की खरीदारी करें, रसोई में इस्तेमाल कुकिंग ऑयल कम से कम खरीदें…।

देशवासियों से पीएम नरेंद्र मोदी की यह अपील आजकल सुर्खियों में है। पीएम के समर्थक इस अपील को जहां स्वागत योग्य करार दे रहे हैं, वहीं विरोधियों ने बेढंगे तर्क देने शुरू कर दिए हैं। सवाल उठता है कि देश की अर्थव्यवस्था के समक्ष क्या कोई बड़ा संकट उत्पन्न होने वाला है? पीएम की अपील को तूफान आने से पहले की चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

ईरान-इजरायल युद्ध का आपकी रसोई पर सीधा वार

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब तक दूर नहीं हो सका है। अमेरिका-ईरान युद्ध ने समूची दुनिया में तेल संकट को बढ़ावा दिया है। मुख्य समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य अभी तक पाबंदियों की चपेट में है। ईंधन की आपूर्ति निरंतर बाधित रहने से आम आदमी की रसोई तक संकट पहुंच चुका है।

खराब स्थिति के लिए खुद को तैयार करें देशवासी

केंद्र सरकार बेशक पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की किल्लत से इनकार करे, मगर एलपीजी गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है। बुकिंग के बाद भी प्रत्येक उपभोक्ता को विलंब से सिलेंडर मिल रहा है। इस बीच नामचीन कारोबारी उदय कोटक ने भावी संकट की तरफ इशारा कर समय से पहले संभलने की सलाह दे डाली है। कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय का बयान चर्चाओं में है। उन्होंने साफ कहा है कि हमें उम्मीद करनी चाहिए कि संकट का समय न आए और ना रहे, मगर हमें सबसे खराब स्थिति के लिए भी खुद को तैयार कर लेना होगा।

उन्होंने कहा कि खतरा बेहद नजदीक है। उदय कोटक के बयान से स्पष्ट है कि कारोबार जगत में खलबली मच चुकी है। कयास लगाए जाने लगे हैं कि पेट्रोल-डीजल के दामों में जल्द अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है। कुकिंग ऑयल पर भी महंगाई की मार पड़ना तय है। कुल मिलाकर आम आदमी को कमर कस लेने की जरूरत है। चूंकि आम आदमी की आय की रफ्तार धीमी है, मगर खर्च की स्पीड बढ़ने वाली है। कोरोना महामारी का दौर कोई भूला नहीं होगा। कोरोना काल ने देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया था। लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में नौकरियां चली गई थीं। लाखों नागरिकों को इधर से उधर पलायन करना पड़ा था। काम-धंधे चौपट हो गए थे।

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कोरोना की मार से तबाह अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में वक्त लगा था। अब मिडिल ईस्ट संकट ने नई चुनौतियां पैदा कर रखी हैं। पीएम मोदी के बयान को निश्चित रूप से गंभीरता से लेने की जरूरत है। भविष्य के खतरे के प्रति उन्होंने आगाह कर दिया है। भावी संकट से सरकार अपने दम पर निपट नहीं सकेगी। ऐसे में देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। 21वीं सदी में समय के साथ जीने का अंदाज भी बदल चुका है। जिनके पास अच्छा पैसा है, वह शाही जिंदगी जीने से कतई परहेज नहीं करते।

सुविधा और संसाधनों पर अंधाधुंध खर्च किया जाता है। भागदौड़ भरी जिंदगी में साइकिल युग में लौटना भी आसान नहीं है। मध्यम आय वर्ग के व्यक्ति के लिए स्कूटी व बाइक लाइफ लाइन की तरह हैं। घर और नौकरी के काम के सिलसिले में छोटे वाहनों का इस्तेमाल रोजमर्रा की बात है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर आम आदमी की जेब पर मार पड़ेगी। नतीजन घर चलाना और अधिक मुश्किल हो जाएगा।

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