खसरा-रुबेला पर वार: स्कूलों में चलेगा विशेष एमआर टीकाकरण अभियान

सुजीत कुमार

मऊ। प्रदेश सरकार खसरा (मीजल्स) और रुबेला उन्मूलन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में राज्य स्तर पर हुई स्टेट टास्क फोर्स की बैठक में एमआर (मीजल्स-रुबेला) अभियान की समीक्षा के बाद निर्णय लिया गया कि पहले चरण में प्रदेश के चिन्हित 45 जनपदों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत 5 से 10 वर्ष तक के सभी बच्चों को एमआर वैक्सीन की एक अतिरिक्त डोज दी जाएगी।

जनपद मऊ में यह अभियान 16 फरवरी 2026 से शुरू होकर अधिकतम 27 फरवरी 2026 तक संचालित किया जाएगा। अभियान को 4 से 6 नॉन-आरआई दिवसों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। इसके अंतर्गत सभी सरकारी स्कूलों, मदरसों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ने वाले बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा।

अभियान को सफल बनाने के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 23 जनवरी को राज्य स्तरीय जूम के माध्यम से संवेदीकरण किया गया। 30 जनवरी को जनपद स्तर पर डीटीएफ प्लानिंग बैठक आयोजित हुई। 7 फरवरी तक स्कूलों का माइक्रोप्लान तैयार किया गया, जबकि 10 फरवरी को ब्लॉक स्तर पर समन्वय बैठक हुई। 12 फरवरी को मीडिया अभिमुखीकरण और राज्य स्तर पर माइक्रोप्लान उपलब्ध कराया गया।स्वा

स्थ्य विभाग की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की एएनएम अपने-अपने क्षेत्र के सभी स्कूलों और मदरसों का माइक्रोप्लान तैयार करें। प्रत्येक स्कूल में टीकाकरण सत्र के दौरान संबंधित एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। एक एएनएम को प्रतिदिन 100 से 125 बच्चों का टीकाकरण करने का लक्ष्य दिया गया है। अधिक बच्चों की संख्या होने पर अतिरिक्त सत्र लगाए जाएंगे।

अभियान के दौरान पर्याप्त मात्रा में एमआर वैक्सीन, एएनाफाइलेक्सिस किट और अन्य जरूरी लॉजिस्टिक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। वैक्सीन को सत्र स्थल तक पहुंचाने के लिए ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध वाहनों का उपयोग किया जाएगा। अभियान के लिए अलग से कोई अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

सभी सत्रों की जानकारी यूविन पोर्टल पर अपलोड की जाएगी और दैनिक रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। जनपद और ब्लॉक स्तर पर नियमित समीक्षा बैठक कर अभियान की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित विभागों और सहयोगी संस्थाओं से अपील की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि खसरा और रुबेला जैसी बीमारियों से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।

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