सत्ता बचाने की लड़ाई में सांप्रदायिकता का सहारा

हम्माम वहीद

विगत वर्ष 16 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी असम के दौरे पर थे। चायगांव में कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा था कि आपका मुख्यमंत्री आने वाले समय में जेल में होगा। उन्होंने कहा कि आपका मुख्यमंत्री खुद को असम का राजा समझता है और वह दिन-रात आपकी कमाई और ज़मीन अडानी-अंबानी को देने की कोशिश में लगा रहता है।

लेकिन यदि आप उनकी बातों को ध्यान से सुनें, तो उनकी आवाज़ में डर साफ़ महसूस होता है। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री को अपने और अपने परिवार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और हड़पी गई ज़मीन का पूरा ब्यौरा देना होगा, जिससे उन्हें न तो मोदी बचा पाएंगे और न ही अमित शाह।

इसके बाद से ही हेमंत बिस्वा शर्मा ने स्तरहीन बयानबाज़ी और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को और धार देना शुरू कर दिया। शर्मा का डर स्वाभाविक है, उन्हें कुर्सी जाने का डर सता रहा है। जैसा कि राहुल गांधी ने कहा था, आप खुद महसूस करेंगे, और वह डर आज साफ़ दिखाई दे रहा है। लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक भाषा की तमाम मर्यादाओं को लांघते हुए इस समय “मियां”, “मुसलमान”, “घुसपैठिया”, “जिहादी” जैसे नए-नए अलक़ाब दिए जा रहे हैं। क्या बंगला भाषा के आधार पर किसी को विदेशी मान लिया जाएगा?

लेकिन इस बार उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ेगा। भ्रष्टाचार और घोटालेबाज़ी जिसमें भाई-भतीजा, सहयोगी मित्र और स्वयं की पत्नी पर भी गंभीर आरोप हैं- से वे बच नहीं सकते और नफ़रत की आड़ में छुप नहीं सकते। वैसे भी पति-पत्नी का भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। हेमंत जब कांग्रेस में थे, तब उन पर करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप लगे—शारदा चिटफंड घोटाला, लुई बर्गर घोटाला—लेकिन भाजपा की वॉशिंग मशीन में जाते ही सब धुल गया।

उनकी पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा की फर्म, जो एक मीडिया चैनल के लिए रजिस्टर है, कृषि भूमि कौड़ियों के दाम पर खरीदती है। क्या कोई मीडिया फर्म कृषि भूमि खरीद सकती है? और कुछ ही दिनों बाद उस कृषि भूमि को औद्योगिक उपयोग में बदल दिया जाता है। इसके बाद प्रधानमंत्री संपदा योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग के लिए आवेदन कर 10 करोड़ रुपये की सब्सिडी ले ली जाती है।

प्रियंका गांधी आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की भ्रष्टाचारी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कमर बस्ता हैं। उनके नेतृत्व में और प्रदेश अध्यक्ष, लोकप्रिय नेता गौरव गोगोई की अगुवाई में असम में जनता की सरकार बनना तय है।

गत दस वर्षों में भाजपा सरकार के पास हिंदू-मुसलमान के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के अलावा न तो कोई ठोस मुद्दा है और न ही वोट मांगने के लिए विकास का कोई वास्तविक दावा। इसलिए सेकुलर, संविधानवादी एवं समावेशी विकास की सोच रखने वाले लोगों के लिए यह परीक्षा की घड़ी है।

क्या आप मूलभूत समस्याओं को नज़रअंदाज़ करके एक भ्रष्ट, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक सरकार को सिर्फ़ इसलिए स्वीकार करेंगे, क्योंकि वह नफ़रत के एजेंडे पर आधारित है?

इसी क्रम में असम भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से एक वीडियो जारी किया गया, जिसे कांग्रेस के कड़े विरोध के बाद हटा लिया गया। उस वीडियो में शर्मा को एयर राइफल संभालते हुए दिखाया गया है, जो असली फुटेज जैसा प्रतीत होता है। इसके साथ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनाए गए क्लिप जोड़े गए हैं, जिनमें एयर राइफल से चली गोलियां टोपी और दाढ़ी वाले पुरुषों की तस्वीरों को निशाना बनाती दिखाई देती हैं, जो साफ़ तौर पर उनकी धार्मिक पहचान को दर्शाने वाले संकेत हैं।

वीडियो प्रसारित होने के बाद, जिसमें शर्मा को नायक के रूप में दिखाया गया है, उसे लेकर पूरे देश में विरोध के स्वर उठे। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, सुप्रिया श्रीनेत और पवन खेड़ा ने वीडियो जारी कर कड़ा विरोध जताया।

कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “भाजपा के एक आधिकारिक हैंडल ने अल्पसंख्यकों की ‘पॉइंट-ब्लैंक’ हत्या दिखाने वाला वीडियो पोस्ट किया। यह सीधे तौर पर नरसंहार का आह्वान है—एक ऐसा सपना जिसे यह फासीवादी शासन दशकों से संजोए हुए है। यह कोई मामूली ट्रोल वीडियो नहीं है। यह ज़हर सबसे ऊपर से फैलाया गया है और इसके नतीजे होने चाहिए। नरेंद्र मोदी से इसकी निंदा या कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, लेकिन न्यायपालिका को कदम उठाना चाहिए और किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए”

कुछ दिन पहले भी शर्मा ने मुसलमानों को परेशान करने का आवाहन किया था। उन्होंने कहा था कि यदि रिक्शा का किराया ₹5 हो तो उसे ₹4 दिया जाए। जब वे परेशान होंगे, तभी असम छोड़ेंगे। जिसको लेकर कांग्रेसजनों ने पूरे देश में उनके विरुद्ध एकआईआर के लिए सैकड़ों तहरीर दी है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसागर ज़िले में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि नीति लोगों को बांग्लादेश की ओर धकेलने की है, और जो लोग अभी अंदर हैं उनके लिए ऐसा तंत्र बनाओ कि वे यहाँ रह न सकें। यही, उनके अनुसार, महात्मा गांधी की सविनय अवज्ञा और असहयोग है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने हमें दो चीज़ें सिखाईं, असहयोग और सविनय अवज्ञा। जब असम के लोग असहयोग और सविनय अवज्ञा करेंगे तो वे अपने आप चले जाएंगे। रिक्शे पर बैठने से पहले सोचो कि किसका रिक्शा ले रहे हो।
यह अत्यंत अफ़सोसनाक है कि शर्मा महात्मा गांधी की विचारधारा को नफ़रत फैलाने के औज़ार के रूप में पेश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत शर्मा अपने नफ़रत भरे भाषणों से उत्तर-पूर्व का चाणक्य बनने की कोशिश कर रहे हैं। कभी वे भूमि जिहाद, लव जिहाद, उर्वरक जिहाद जैसे नारे लगाते हैं, कभी मुसलमानों से मछली न खरीदने की अपील करते हैं, तो कभी मुस्लिम द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को नौकरी न देने का ऐलान करते हैं।

इससे पहले उन्होंने तेलंगाना में कहा था कि हमने असम में 600 मदरसों को बंद किया है और 300 और मदरसों को बंद किया जाएगा। बहरहाल, शर्मा की नफ़रत की राजनीति की आयु लंबी नहीं है। उन्हें अपनी सांप्रदायिक राजनीति का मूल्यांकन करना होगा कि अतीत में ऐसे लोगों का क्या हश्र हुआ। नफ़रत की राजनीति अंततः अपने अंजाम तक पहुँचती है और उससे वे भी अछूते नहीं रहेंगे।

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