तेल नहीं भारत को अब रूस ये क्या भेजने लगा, ट्रंप की उड़ जाएगी नींद
India Russia deal: रूस ने अमेरिकी दबाव का जवाब नए व्यापार समझौते से दिया, भारत के साथ बढ़ाया व्यापार और तेल पर निर्भरता घटाई।
India Russia deal: रूस ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है जिसने अमेरिका के लिए नई समस्या खड़ी कर दी है। जिस प्रकार से अमेरिका ने रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की, रूस ने उसी रास्ते पर उलटकर अपने पैरों पर खड़ा होने का तरीका ढूंढ लिया। खासतौर पर रूस की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर अमेरिका ने जो प्रेशर बनाया था अब रूस ने उस दबाव का जवाब सोने के जरिए देना शुरू कर दिया है।
तेल के बाद अब क्या बेच रहा रूस
अमेरिका ने रूस के तेल निर्यात को लक्ष्य बनाकर अपने प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा दिया था। डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद रूस की ऊर्जा निर्यात पर विशेष ध्यान दिया गया था। अमेरिका ने रूस के तेल और गैस उद्योग को कमजोर करने के लिए कई कदम उठाए। इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भी दबाव डाला गया। भारत को भी रूस से तेल खरीदने पर भारी शुल्क लगाने की धमकी दी गई, जिससे उम्मीद थी कि रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ेगी और युद्ध की रफ्तार धीमी होगी।
लेकिन रूस ने अप्रत्याशित कदम उठाया। जब तेल पर दबाव बढ़ा, तो उसने अपना रास्ता बदलते हुए भारत के साथ सोने के व्यापार में तेजी लाई। एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के पहले दस महीनों में रूस ने भारत को 5 करोड़ डॉलर से अधिक का सोना बेचा। यह आंकड़ा भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के डाटा पर आधारित है और यह स्पष्ट रूप से यह बताता है कि रूस ने तेल की बजाय सोने पर निर्भरता बढ़ा दी है।
रूस की सोने पर नई नजरें और भारत के साथ बढ़ता व्यापार
जानकारों का मानना है कि रूस का यह कदम केवल व्यापारिक नहीं है, बल्कि ये अमेरिका को एक सख्त संदेश भी है। अगस्त 2025 में रूस ने भारत को 2.34 करोड़ डॉलर का सोना भेजा। यह 2021 के बाद की सबसे बड़ी सोने की डिलीवरी मानी जा रही है।
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अक्टूबर में भी रूस ने भारत को 2.69 करोड़ डॉलर का सोना निर्यात किया, जिससे यह साफ हो गया कि रूस अब भारत के साथ व्यापार में सोने को एक महत्वपूर्ण विकल्प बना चुका है।



