इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्राधिकरण में मची हलचल, जानें योगी सरकार ने क्या कार्रवाई की

नोएडा में युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला आजकल सुर्खियों में है। जानलेवा हादसे के बाद योगी सरकार की सख्ती से नोएडा प्राधिकरण में हड़कंप मचा है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एम. लोकेश को पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को सेवा से बर्खास्त किया गया है।

सीईओ और जेई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि प्राधिकरण की लापरवाही के कारण इंजीनियर मेहता को जान गंवानी पड़ी। निर्माणाधीन शॉपिंग मॉल के बेसमेंट में पानी भरने की वजह से यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। घने कोहरे की वजह से इंजीनियर युवराज मेहता की कार गलत दिशा में जाकर पानी से भरे बेसमेंट में घुस गई। बेसमेंट के आसपास अवरोधक न होने से हादसे को टाला नहीं जा सका। पुलिस, गोताखोर टीम और राहगीरों के भरसक प्रयास के बावजूद युवराज की जान नहीं बच पाई।

बहुत भयानक था हादसा

हादसे की कल्पना करने मात्र से शरीर में सिहरन दौड़ पड़ती है। युवराज की उम्र ज्यादा नहीं थी। वह इंजीनियरिंग जगत में खूब मेहनत कर अपने परिवार को ढेरों खुशियां देने की चाहत रखता था, मगर किस्मत को यह मंजूर नहीं था। निश्चित रूप से इस मामले में प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। यदि प्राधिकरण के निर्माण विभाग की टीम फील्ड में सक्रिय रहती तो बेसमेंट में भरे पानी को देखकर संभावित दुर्घटना को ध्यान में रखकर मॉल प्रबंधन को समय पर जरूरी दिशा-निर्देश दे सकती थी।

युवराज मेहता की मौत पर मचे बवाल ने योगी सरकार को भी इस प्रकरण की सुध लेने पर मजबूर कर दिया। सरकार ने हादसे की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। एसआईटी की जांच में मॉल प्रबंधन की वह खामियां भी सामने आने की उम्मीद हैं, जो अभी तक पर्दे के पीछे हैं। नोएडा शहर की पहचान आज देश-दुनिया में है। विकास की दृष्टि से देखें तो इस शहर ने गाजियाबाद को भी पीछे छोड़ रखा है। नोएडा को गगनचुंबी इमारतों और उद्योगों का शहर भी माना जाता है।

देश-विदेश की नामचीन कंपनियों के मुख्यालय भी इस शहर में स्थापित हो चुके हैं। वर्तमान में विभिन्न सेक्टरों में आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। ताजा हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण का ध्यान तमाम निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स की ओर गया है। बात चाहे नोएडा की हो या गाजियाबाद, दोनों शहरों में अक्सर किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम के दौरान जानलेवा हादसों की रोकथाम के लिए लापरवाही देखने को मिलती है। निर्माणाधीन स्थल पर जलभराव के कारण हादसा होने का खतरा हमेशा रहता है। गाजियाबाद में भी इस प्रकार के हादसे सामने आ चुके हैं।

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गाजियाबाद में गौशाला अंडरपास में बरसाती पानी भरने से चारपहिया वाहन चालक की मौत हो गई थी। इसके अलावा बरसात के मौसम में गंदगी और पानी से लबालब नालों में डूबने से कई बच्चों की जान जा चुकी है। इंजीनियर युवराज मेहता का वापस लौटना अब कतई मुमकिन नहीं है। मेहता की मौत के मामले से सबक लेने की जरूरत है। नोएडा प्राधिकरण को ऐसे कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके। निर्माण स्थलों पर खुदाई के दौरान आसपास अवरोधक जरूर लगाए जाने चाहिए ताकि कोई निर्दोष व्यक्ति दुर्घटना की चपेट में न आ सके।

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