यूपी के 8 लाख कर्मचारियों को अल्टीमेटम; 31 जनवरी तक नहीं किया ये काम, तो रुक जाएगी सैलरी

उत्तर प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सरकार की टेड़ी नजर हमेशा रहती है। सरकारी कामकाज और योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने पर निरंतर जोर दिया जाता है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की ऑनलाइन एवं ऑफलाइन शिकायतें मिलने पर जांच कराकर समुचित कार्रवाई की कोशिश की जाती है। इसके बावजूद भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी यदा-कदा रंगेहाथ पकड़े भी जाते हैं।
यूपी को ‘करप्शन फ्री’ रखना सरकार की जिम्मेदारी है और मकसद भी। इस बीच योगी सरकार का एक आदेश इन दिनों सरकारी मशीनरी में चर्चाओं का विषय बना है। दरअसल सरकार ने मानव संपदा पोर्टल पर राज्य कर्मियों की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन करना अनिवार्य कर दिया है। यूपी में आठ लाख से अधिक राज्य कर्मचारी हैं। इसके लिए 31 जनवरी तक की डेडलाइन निर्धारित की गई है। तय समयावधि में चल-अचल संपत्तियों का विवरण ऑनलाइन उपलब्ध न कराने पर जनवरी माह की सैलरी रोक दी जाएगी। इसके अलावा संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया पर विचार नहीं किया जाएगा।
धोना पड़ सकता है प्रमोशन से हाथ
यानी वेतन रूकने के अलावा प्रमोशन से भी हाथ धोना पड़ सकता है। योगी सरकार का यह कदम वाकई प्रशंसनीय है। सरकारी जॉब को बेहतर भविष्य की गारंटी माना जाता है। कोरोना काल में सरकारी नौकरी की महत्ता का पता चला था। जब नामचीन निजी कंपनियों में छंटनी का दौर चल रहा था तब सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी जॉब की गारंटी को लेकर आश्वस्त दिखाई पड़े थे।
कोरोना काल में सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं के लिए सरकारी कार्मिकों का इस्तेमाल किया गया था। वैसे भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को अच्छा वेतनमान मिलता है। साल दर साल वेतन में वृद्धि के अलावा अनुभव एवं योग्यता के आधार पर प्रमोशन मिल जाता है। इसके विपरीत निजी कंपनियों में जॉब की गारंटी नहीं होती। दुनिया के किसी हिस्से में आर्थिक मंदी आने पर निजी कंपनियों के पांव कांपने लगते हैं। ऐसे में सरकारी अधिकारी व कर्मचारी जब अच्छी पगार पाते हैं तो उन्हें अपनी चल-अचल संपत्तियों का विवरण देने से कतई पीछे नहीं हटना चाहिए। इससे उनकी काम के प्रति ईमानदारी का भी पता चलता है।
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वैसे सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी दो नंबर की इनकम को ठिकाने लगाने का कोई न कोई रास्ता ढूंढ कर रखते हैं। इसी का नतीजा है कि जब किसी बेईमान अधिकारी या कर्मचारी के ठिकानों पर रेड डाली जाती है तो अघोषित आय और संपत्तियों का खुलासा होता है। अक्सर ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब नकदी की गणना करने के लिए मशीनों का सहारा लेना पड़ा है। सरकारी विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त रखना बेहद जरूरी है। यदि अधिकारी-कर्मचारी ईमानदार होंगे तो इसका लाभ देश, समाज और आम नागरिकों को भी मिलेगा।
चूंकि सरकारी कार्य यदि ईमानदारी से होंगे तो न नवनिर्मित पुल गिरेंगे, न सड़कें उखड़ेंगी। सरकारी दफ्तरों में घूस लेने का प्रचलन आज भी बंद नहीं हो सका है। ऊपर की कमाई कर सरकारी कर्मचारी शाही जिंदगी जीने का इंतजाम करते हैं। मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा दर्ज होने से भी पता चल जाएगा कि किसी अधिकारी या कर्मचारी के ठाठ समय के साथ कितने बढ़े हैं। सीमित वेतन में क्या ऐसे ठाठ संभव हैं, जिनमें रहकर वह जीवन यापन कर रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य कर्मचारी पूरी ईमानदारी के साथ यह विवरण उपलब्ध कराएंगे।



