दिग्गी राजा के ‘मन की बात’ ने हिला डाली कांग्रेस, गांधी परिवार में मची खलबली

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह के ‘मन की बात’ सार्वजनिक होने पर सियासी बखेड़ा खड़ा हो गया है। राजनीति के ‘दिग्गी राजा’ की बदली सोच ने नए साल से पहले प्रतिद्वंदी BJP और आरएसएस को ‘फील गुड’ का अहसास कराया है। सोशल मीडिया पर दिग्विजय सिंह की अप्रत्याशित पोस्ट से समूचा विपक्ष जहां स्तब्ध है, वहीं कांग्रेस के भीतर से अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं।
खासकर गांधी परिवार में बेचैनी उत्पन्न होना स्वाभाविक है। दिग्विजय सिंह के सत्य वचन से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के दिल को ठेस जरूरी पहुंची है। इस बीच डैमेज कंट्रोल की कोशिश तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के धुर विरोधी दिग्विजय सिंह अक्सर चर्चाओं में रहते हैं।
कभी विवादित बयानबाजी तो कभी पर्सनल लाइफ की वजह से वह समाज का ध्यान अपनी ओर खींचते रहे हैं। आरएसएस और BJP की संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा कर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को एक तरह से आईना दिखाने का काम किया है। सांसद शशि थरूर ने भी दिग्गी राजा के बयान पर सहमति जाहिर कर कांग्रेस संगठन में बदलाव लाने की जरूरत पर जोर दिया है।
दिग्विजय सिंह की पोस्ट से सियासी हलचल
ऐसे में BJP को कांग्रेस पर जुबानी हमला करने का सुनहरा अवसर मिल गया है। दरअसल दिग्विजय सिंह ने लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी की काफी पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। यह तस्वीर नब्बे के दशक की बताई जाती है। तस्वीर में लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं। जबकि नरेंद्र मोदी उनके आगे जमीन पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। ये तस्वीर पोस्ट करने के साथ दिग्विजय ने लिखा कि आरएसएस का एक स्वयंसेवक एवं BJP का जमीनी कार्यकर्ता जमीन पर बैठकर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बना।
दिग्विजय सिंह ने मोदी की कामयाबी के पीछे आरएसएस और BJP की मजबूत संगठनात्मक शक्ति को अहम कारण बताया है। दिग्गी राजा ने इस फोटो को प्रभावशाली बताकर उसे संगठन की शक्ति का परिचायक भी कहा। उन्होंने अपनी पोस्ट को कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के साथ पीएम मोदी को भी टैग किया। यह पोस्ट इस तरफ इशारा करती है कि वह कांग्रेस की सांगठनिक कमजोरी से बेचैन हैं और यह चाहते हैं कि पार्टी नेतृत्व संगठन पर ध्यान दे। दिग्गी राजा ने कुछ दिन पहले भी एक पोस्ट की थी, जिस पर खासी चर्चाएं हुई थीं।
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पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि कांग्रेस को सुधारों और विकेंद्रीकरण की आवश्यकता है। इस पोस्ट में उन्होंने यह अपेक्षा तो जताई थी कि राहुल ऐसा करेंगे, मगर इसी के साथ यह भी कहा था कि समस्या यह है कि उन्हें सहमत करना कठिन है। यह पहली बार नहीं, जब कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता ने पार्टी की कमियों को रेखांकित किया हो, मगर कहीं कोई बुनियादी परिवर्तन होता नहीं दिख रहा है। एक समय गांधी परिवार कांग्रेस की ताकत माना जाता था, मगर अब स्थिति बदल चुकी है।
कांग्रेस की कमान बेशक खरगे के हाथ में हो, मगर वास्तविक पावर गांधी परिवार के पास है और वह संगठन को मजबूत करने की बजाय अपनी नाकामियों का दोष मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर मढ़ने में लगा है। शशि थरूर की BJP से नजदीकी लंबे समय से कांग्रेस नेतृत्व को परेशान करती रही है। अब दिग्विजय सिंह जैसे पुराने एवं दिग्गज नेता ने निश्चित रूप से गांधी परिवार को टेंशन में डाल दिया है।



