ताजमहल के बाद शाहजहां करना चाहते थे ये काम, लेकिन सपना अधूरा रह गया

दुनिया भर के लोग जब ताजमहल देखने आते हैं तो सिर्फ सफेद संगमरमर की चमक देखकर लौट जाते हैं। मगर बहुत कम लोगों को पता है कि शाहजहां इसके सामने यमुना नदी के दूसरी किनारे पर एक बिल्कुल काला ताज बनवाना चाहते थे। दोनों ताज एक-दूसरे के सामने खड़े होकर चाँदनी रात में एक-दूसरे को आईने की तरह दिखाते। ये उनका सबसे बड़ा ख्वाब था जो कभी सच नहीं हो सका।

ब्लैक ताज का प्लान क्यों टूट गया

1653 में जब सफेद ताजमहल का उद्घाटन हुआ तब भी कुछ बारीक काम बाकी थे जो अगले एक-दो साल तक चलते रहे। ठीक उसी वक्त उनके बेटे औरंगजेब ने बगावत कर दी। शाहजहां को आगरा किले में कैद कर लिया गया और ब्लैक ताज का सारा प्लान हमेशा के लिए दफन हो गया। मुमताज महल की याद में शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट उनके लिए आखिरी सांस तक अधूरा ही रहा।

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22 साल की मेहनत और एक प्रेम कहानी

मुमताज महल का इंतकाल जून 1631 में हुआ था। इसके महज एक साल बाद यानी 1632 में ताजमहल की असली नींव पड़ी। मुख्य मकबरा सिर्फ 11 साल में तैयार हो गया मगर पूरा परिसर बनने में पूरे 22 साल लग गए। 1653 तक ताजमहल दुनिया के सामने था मगर शाहजहां इसे देख भी नहीं पाए थे क्योंकि तब तक वो कैदी बन चुके थे।

आज भी लाखों लोग खिंचे चले आते हैं

हर साल लाखों सैलानी ताजमहल देखने आते हैं। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ये इमारत आज भी प्रेम की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है। मगर इसके पीछे जो अधूरी कहानी छुपी है वो शायद ही कोई जानता हो। सफेद ताज तो बन गया पर उसका काला हमसफर कभी जमीन पर उतर ही नहीं पाया। शाहजहां की ये प्रेम कहानी आज भी यमुना के दोनों किनारों पर अधर में लटकी हुई है।

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