बासमती किसानों पर संकट के बादल

दामों में भारी गिरावट से गहराई चिंता

इटावा। बासमती चावल उत्पादन में तेजी से उभरते इटावा के किसान इस बार भारी नुकसान की आशंका से घिरे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव और अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को लेकर किसानों में गहरी चिंता है। स्थानीय मंडियों में बासमती चावल के दाम अचानक टूटकर 2 हजार 500 प्रति कुंतल तक पहुंच गए हैं, जबकि पिछले वर्ष यही बासमती 4 हजार प्रति कुंतल में आसानी से बिक रही थी।

दामों में आई इस गिरावट ने किसानों की उम्मीदों को झटका दिया है। किसान बताते हैं कि बासमती चावल की खेती पर जितना खर्च आया, उतना खर्च भी अब निकलता दिखाई नहीं दे रहा। उनका कहना है कि सरकार ने इटावा को बासमती उत्पादन का प्रमुख हब बनाने की योजना जरूर बनाई थी और पिछले साल करीब 300 करोड़ की बासमती बिक्री भी हुई थी, लेकिन इस वर्ष बाजार पूरी तरह ढह गया है। पिछले साल ऊंचे भाव मिलने से किसानों को भारी फायदा हुआ था, लेकिन इस बार स्थिति उलट है। किसान मायूस हैं और लगातार गिरते दामों को लेकर परेशान भी।

किसानों का कहना है कि यदि सरकार बासमती चावल के लिए प्रभावी एक्सपोर्ट नीति लागू करे, तो दाम दोबारा संभल सकते हैं। फिलहाल निर्यात व्यवस्था न होने का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है। किसानों का यह भी मानना है कि अमेरिकी टैरिफ ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की मांग को प्रभावित किया है, जिसके कारण घरेलू बाजार में कीमतें धड़ाम हो गई हैं।

हालात ऐसे हैं कि उत्पादन लागत भी पूरी नहीं हो पा रही और खेतों में मेहनत करने वाले किसान खुद को नुकसान में पा रहे हैं।

कुलदीप, किसान इस बार दाम इतने गिर गए हैं कि लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है। सरकार अगर निर्यात बढ़ाए, तो किसानों को राहत मिल सकती है। अरविंद यादव, किसान पिछले साल 4 हजार रुपये में बिकने वाला बासमती अब 2 हजार 500 में भी मुश्किल से बिक रहा है। अमेरिकी टैरिफ का असर साफ दिख रहा है। इटावा के किसानों की आवाज अब सरकार तक पहुंचने का इंतजार कर रही है, ताकि बासमती की खेती करने वाले हजारों किसान इस संकट से उबर सकें।

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