unrest in ladakh: देशभक्त या देशद्रोही, सोनम वांगचुक पर सवाल
सोनम वांगचुक की एनएसए के तहत गिरफ्तारी ने लद्दाख में उबाल ला दिया है। जानें क्या है मामला और क्यों उठ रही है रिहाई की मांग।

unrest in ladakh: लेह में हिंसा के बाद से जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक निरंतर सुर्खियों में हैं। वह फिलहाल जेल में बंद हैं। भारतीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तारी होने से वह मुश्किलों में घिर गए हैं।
वह लेह-ladakh के नागरिकों की आवाज को मुखरता से उठाते रहे हैं। सोनम वांगचुक के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई का विरोध बढ़ रहा है। उनके समर्थक पुलिस-प्रशासन और सरकार की सोच एवं कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो न्याय की खातिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई हैं। केंद्रशासित प्रदेश leh ladakh में शांति लौट चुकी है। जनजीवन सामान्य हो चुका है।
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का कारण (violence in ladakh)
पुलिस-प्रशासन ने पाबंदियां हटा ली हैं, मगर सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाने का सिलसिला जारी है। लेह में पिछले दिनों भड़की हिंसा के लिए क्या वांगचुक कसूरवार हैं? क्या उन्होंने युवाओं को भड़का कर ladakh में unrest माहौल बना दिया था?
क्या वांगचुक के इशारे पर तोड़फोड़ व आगजनी की गई थी? जो व्यक्ति उन्हें नजदीक से जानते हैं, वह दावा करते हैं कि वांगचुक को हिंसा कतई प्रिय नहीं है। वह सरल एवं शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं।
लद्दाख में बवाल के पीछे की वजह (unrest reson in ladakh)
वांगचुक काफी समय से ladakh को पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची का दर्जा देने की डिमांड करते रहे हैं। वह खुद को गांधीवादी बताते हैं और अनशन को महात्मा गांधी का अहिंसक हथियार मानते हैं। सोनम वांगचुक की जिंदगी और काम का असर बॉलीवुड पर भी पड़ा।
अभिनेता आमिर खान की फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में फुनसुख वांगड़ू का किरदार उनके जीवन से प्रेरित माना जाता है। हालांकि वांगचुक कह चुके हैं कि किरदार सीधे तौर पर उन पर आधारित नहीं था, मगर फिल्म में दिखाई गई सादगी और इनोवेशन उनकी असली जिंदगी से मेल खाती है।
कुछ साल पहले वांगचुक ने भारतीय सेना के लिए खास ‘कवच’ बनाया था। ये ऐसा कवच था जो माइनस बीस डिग्री के तापमान में भी गर्म रहे। इसके पहले उन्होंने खास सोलर हीटिंग वाला टेंट बनाया था।
सैन्य जवानों की कठिन ड्यूटी को ध्यान में रखकर यह टेंट तैयार किया गया था। ladakh के सियाचिन और गलवान घाटी जैसे स्थानों पर यह टेंट बेहद काम का निकला। उन्हें रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
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क्या सोनम वांगचुक देशविरोधी हैं?
क्या सोनम वांगचुक जैसा व्यक्ति कभी देशविरोधी कृत्यों को हवा दे सकता है, इस मुद्दे पर देशभर में बहस चल पड़ी है। लेह-ladakh में जिंदगी आसान नहीं है। मूसलाधार बारिश, बर्फीली हवाओं के तूफान, बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से वहां के नागरिकों को अक्सर मोर्चा लेना पड़ता है।
चुनौतीपूर्ण जीवन के बावजूद सोनम वांगचुक ने न सिर्फ अच्छी शिक्षा हासिल की बल्कि सामाजिक कार्यों के प्रति भी खुद को खपा दिया। आज वह इस राज्य में युवाओं के लिए किसी प्रेरणा स्त्रोत से कम नहीं हैं, मगर ladakh unrest (अशांति) ने उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल दिया है।
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खुद पर लगे गंभीर आरोपों को यदि वह गलत साबित करने में नाकाम रहते हैं तो भविष्य में उन्हें लंबे समय तक जेल के भीतर जीवन गुजारना पड़ेगा। लेह-ladakh पर चीन व पाकिस्तान की लालची नजरें भी टिकी रहती हैं। अलबत्ता केंद्र सरकार को पड़ोसी मुल्कों के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।
ये मुल्क लेह-ladakh के नागरिकों का इस्तेमाल अपना मकसद पूरा करने में कर सकते हैं। वैसे सोनम वांगचुक जैसे व्यक्तियों को आजीवन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मौजूदा संकट से वह कैसे बाहर आ पाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।



