11 साल बाद भी नहीं भरा मोदी का दिया ‘जख्म’, कांग्रेस के नए आरोप से मची सनसनी

धूल चेहरे पर जमी थी और मैं आईना साफ करता रहा…। कांग्रेस की मौजूदा हालत पर यह पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं। पूर्व सांसद कुमार केतकर ने दिल्ली की गद्दी से कांग्रेस की बेदखली के पीछे जो कारण सामने रखा है, वह वाकई हास्यास्पद और सत्य से परे है। पार्टी की असफलता पर पर्दा डालने के लिए वरिष्ठ नेता निरंतर सनसनीखेज दावे करते रहते हैं। इसके बावजूद देश की जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती है।

राज्यसभा के पूर्व सांसद कुमार केतकर का नया दावा सिर्फ पार्टी की खिसियाहट का नतीजा भर है। केतकर ने यह कहकर सनसनी फैलाने का प्रयास किया है कि 2014 में कांग्रेस इसलिए हारी, क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने उसे हराने की साजिश रची थी। यानी जो पार्टी अब तक अपनी विभिन्न चुनावी पराजय के लिए कभी इलेक्शन कमीशन तो कभी ईवीएम को कसूरवार ठहराती रही है, वह नए दावे के साथ सामने आई है।

कांग्रेस को यह याद रखना चाहिए कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से पहले अमेरिका ने यूएस में प्रवेश की अनुमति देना तक जरूरी नहीं समझा था।

यह हिंदुस्तान की जनता की ताकत का परिणाम है कि पीएम मोदी आज दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका के आगे भी नहीं झुक रहे हैं। अमेरिका के मनमाने फैसलों को नकारा जा रहा है। सीआईए द्वारा भारत में गड़बड़ी फैलाने से जुड़ी खबरें आए दिन चर्चाओं में रहती हैं।

दरअसल ग्यारह साल पहले पीएम मोदी ने कांग्रेस को जो गहरा जख्म दिया था, वह आज तक भर नहीं पाया है। इस अवधि में कांग्रेस केंद्र के अलावा विभिन्न राज्यों में अपनी ताकत को खोती आ रही है। पूर्व सांसद केतकर के आरोपों पर भाजपा ने तीखा पलटवार करने में देर नहीं लगाई है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा है कि जो पार्टी आईएसआई के ब्लूप्रिंट पर काम करेगी, बाबरी फिर से बनवाने की बात करेगी, राम मंदिर का विरोध करेगी, वह कैसे प्रगति कर सकती है।

बढ़ चुकी है सियासी तनातनी

बहरहाल इस मुद्दे पर सियासी तनातनी बढ़ चुकी है। बिहार विधानसभा चुनाव में राजद-कांग्रेस की शर्मनाक हार ने दोनों दलों की बेचैनी बढ़ा रखी है। लालू यादव के परिवार में बढ़ते मनमुटाव ने जहां राजद को परेशान कर रखा है, वहीं कांग्रेस अपनी कमियों को छिपाने की खातिर नए-नए बहाने ढूंढ रही है। मनगढ़ंत आरोप लगाकर वह जनता का समर्थन बटोरने के नाकाम प्रयास कर रही है।

राहुल गांधी को खुश करने की पार्टी नेताओं में होड़ मची है। राहुल गांधी के सक्रिय राजनीति में आने का पार्टी को कोई बड़ा लाभ नहीं मिल पाया है। कांग्रेस लगातार खराब प्रदर्शन का रिकॉर्ड कायम कर रही है। इसके इतर पीएम मोदी के नेतृत्व में न सिर्फ देश बल्कि भाजपा बेहद मजबूत स्थिति में आ चुकी है। सरकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त रखने, पारदर्शिता लाने और पात्रों को इन योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास जारी हैं।

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पीएम आवास योजना से लेकर किसान सम्मान निधि जैसे कदमों ने जरूरतमंदों की उम्मीदों को पंख लगाए हैं। भाजपा एकजुट होकर आगे बढ़ रही है। जबकि कांग्रेस में असंतुष्ट नेताओं और धड़ों की फेहरिस्त लंबी हो रही है। खुद पुराने कांग्रेसी मानने लगे हैं कि गांधी परिवार की छाया से बाहर आए बिना पार्टी का उद्धार संभव नहीं है। राहुल गांधी यदि सच्चाई से मुंह चुराते रहेंगे तो वह न अपना, ना पार्टी का भला कर पाएंगे।

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