Parivartani Ekadashi 2025 Kab Hai; जानें तिथि, पूजा और पारण समय

परिवर्तनी एकादशी 2025: जीवन में बदलाव लाने वाली एकादशी की पूरी जानकारी

Parivartani Ekadashi 2025: प्रत्येक एकादशी का एक अलग महत्व होता है। हिंदू धर्म में सभी पर्व, त्योहार, उत्सव, व्रत और तपस्याएँ प्रकृति से जुड़ी होती हैं। 3 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी 2025 है। इस एकादशी को पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस एकादशी के पीछे की कथा। आइए, इसके महत्व और व्रत-विधि को भी समझते हैं।

राजा मान्धाता को भी इस Ekadashi से हुआ था लाभ

बहुत समय पहले सूर्यवंशी राजा मंधाना के राज्य पर सूखे का संकट आ गया था। उस समय उन्होंने ऋषि अंगिरा से इसका उपाय पूछा। उस ऋषि की सलाह पर राजा ने भक्ति भाव से पद्मा एकादशी का व्रत किया। फलस्वरूप, वर्षा हुई और सूखे का संकट दूर हो गया। राजा और प्रजा सुखी हो गए। हमें अपनी उन्नति और समाज में परिवर्तन के लिए भी यह व्रत करना चाहिए। जैसा कि मौली ने पसायदान में कहा है, ‘जो जे वंचिल तो ते लाहो’ अर्थात सभी को जो चाहिए वह मिले और वे सुखी रहें। यही परिवर्तिनी एकादशी का महत्व है।

2025 का Parivartani Ekadashi व्रत कैसे करें

इस व्रत को करने के लिए व्रती को सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूरे दिन उपवास रखें और रात्रि में नाम जपते हुए जागरण करें। द्वादशी तिथि को प्रातः सात्विक भोजन करके व्रत का पारण करना चाहिए। विष्णु भक्तों के लिए Parivartani Ekadashi एक पर्व है। इसलिए, जो लोग नियमित रूप से सभी एकादशियों का पालन करते हैं, उन्हें यह एकादशी भी करनी चाहिए। जो लोग व्रत नहीं कर सकते, उन्हें भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। साथ ही, सादा सात्विक आहार लें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। या विष्णु सहस्रनाम का श्रवण और पाठ करें। निरंतर ईश्वर स्मरण करने से मन शुद्ध होता है, मन प्रसन्न रहता है और कार्य करने के लिए नई ऊर्जा मिलती है। इससे हमारे जीवन में और हमारे कारण दूसरों के जीवन में भी खुशियों का संचार होता है!

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यदि इस दिन श्रवण नक्षत्र हो तो इस एकादशी को ‘विजया एकादशी’ भी कहते हैं। भक्तों का मानना ​​है कि इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। इस विजया एकादशी के पावन दिन वामन भगवान की पूजा करने का विधान है। अगले दिन भोग लगाकर यह व्रत पूर्ण किया जाता है।

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