रोज़ 8 घंटे की जॉब ने 35 साल के इस लड़के को पहुंचा दिया अस्पताल, क्या आप भी कर रहे हैं ये 3 खतरनाक गलतियां

sitting job health risks: आज के डिजिटल और कॉर्पोरेट दौर में अधिकांश युवा सिटिंग जॉब्स कर रहे हैं, जहां रोजाना लगातार 8 से 10 घंटे कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर या लैपटॉप स्क्रीन के सामने काम करना आम बात हो चुकी है।
बिना किसी शारीरिक गतिविधि के पूरे दिन एक ही जगह जमे रहने की यह आदत धीरे-धीरे शरीर के अंदर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जाल बुन रही है। जानी-मानी हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. शालिनी सिंह सालुंके ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक बेहद चौंकाने वाला केस साझा करते हुए आगाह किया है कि कैसे डेस्क जॉब और खराब लाइफस्टाइल के कॉम्बिनेशन ने 35 साल के एक पूरी तरह फिट दिखने वाले युवक को सीधे आईसीयू (ICU) के बिस्तर पर पहुंचा दिया।
पैर में खिंचाव को समझा कमजोरी, अगले ही दिन ऑफिस में हुआ बेहोश
डॉ. शालिनी के अनुसार, 35 वर्षीय रमेश आईटी सेक्टर में कार्यरत था और उसकी जॉब में रोजाना 10 घंटे लगातार बैठे रहना अनिवार्य था। कुछ दिनों से रमेश के एक पैर में हल्का दर्द और खिंचाव महसूस हो रहा था, जिसे उसने सामान्य कमजोरी मानकर पेनकिलर और मल्टीविटामिन की गोलियां खा लीं। अगले दिन उसे हल्की खांसी और चलने-फिरने के दौरान सीने में सांस फूलने जैसा भारीपन महसूस हुआ।
इन गंभीर लक्षणों के बावजूद वह ऑफिस चला गया, लेकिन जैसे ही लिफ्ट से बाहर निकला, वह अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। सहकर्मी उसे फौरन नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया। समय पर इलाज मिलने से रमेश की जान बच गई, जबकि इस बीमारी में 30 से 40 प्रतिशत मामलों में मरीज की मौके पर ही मौत हो जाती है।
क्या है पल्मोनरी एम्बोलिज्म? फेफड़ों तक कैसे पहुंचा खून का थक्का
जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि रमेश ‘पल्मोनरी एम्बोलिज्म’ (Pulmonary Embolism) जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ चुका था। घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से उसके पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) बन गया था, जिसे मेडिकल भाषा में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहा जाता है। यह क्लॉट पैर की नस से टूटकर रक्त प्रवाह के जरिए फेफड़ों की प्रमुख नसों में जाकर फंस गया, जिससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई रुक गई और फेफड़े का हिस्सा डैमेज हो गया। डेस्क जॉब करने वाले लाखों कामकाजी प्रोफेशनल्स अनजाने में इसी तरह के खतरे की ओर बढ़ रहे हैं।
एसिडिटी या हार्ट अटैक, एक गलती पड़ सकती है भारी, इन संकेतों को पहचानें
सिटिंग जॉब वाले न करें ये 3 जानलेवा गलतियां
डॉ. शालिनी ने बताया कि डेस्क जॉब के दौरान अक्सर लोग तीन बड़ी गलतियां करते हैं जो इस जानलेवा स्थिति को जन्म देती हैं-
-
लगातार 8-10 घंटे बैठे रहना: कुर्सी पर घंटों बिना हिले-डुले काम करने से पैरों की नसों में ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है, जिससे क्लॉटिंग का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
-
धूम्रपान और सेडेंटरी लाइफ: स्मोकिंग करने से खून गाढ़ा होने लगता है और डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) का खतरा तेजी से बढ़ता है, जिसके चलते पैरों में सुन्नपन या खिंचाव होने लगता है।
-
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना: पैर में असामान्य दर्द, सूजन, भारीपन या सीने में अचानक सांस की तकलीफ को केवल थकान या मोच समझकर पेनकिलर खा लेना बेहद भारी पड़ सकता है; ऐसे लक्षण दिखते ही फौरन डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
1 घंटे से ज्यादा न बैठें: डॉक्टर ने दिया जिंदगी बचाने वाला गोल्डन रूल
हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. शालिनी की सलाह है कि अगर आपकी सिटिंग जॉब है, तो हर हाल में एक नियम बांध लें कि लगातार एक घंटे से ज्यादा कुर्सी पर बिल्कुल न बैठें। हर 45 से 50 मिनट के बाद अपनी सीट से उठकर 2-3 मिनट की वॉक जरूर करें या पानी पीने के बहाने थोड़ा चलें। यदि मीटिंग या व्यस्तता के कारण उठना संभव न हो, तो कुर्सी पर बैठे-बैठे ही पैरों का ‘एंकल-टू-टो मूवमेंट’ करें यानी टखनों को गोल घुमाएं और पंजों को ऊपर-नीचे हिलाते रहें। पैरों की पिंडलियों की मांसपेशियों में यह हलचल ब्लड फ्लो को बनाए रखती है और जानलेवा खून के थक्के जमने से बचाती है।



