घर में इन बर्तनों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सावधान, वास्तु के मुताबिक बढ़ सकती हैं परेशानियां

Vastu tips for broken utensils: अक्सर देखा जाता है कि घरों में कप, प्लेट, कटोरी या गिलास हल्के-फुल्के चटक जाते हैं, लेकिन हम ‘अभी तो काम चल रहा है’ सोचकर उनका बेधड़क इस्तेमाल करते रहते हैं। दैनिक जीवन की यह साधारण सी आदत वास्तु शास्त्र और धार्मिक दृष्टिकोण से परिवार के सुख-चैन पर भारी पड़ सकती है। वास्तु नियमों के अनुसार घर में मौजूद बर्तनों की स्थिति का सीधा संबंध परिवार की आर्थिक संपन्नता और मानसिक शांति से होता है। विशेष रूप से खंडित या दरार वाले बर्तनों में भोजन पकाना या परोसना अत्यंत अशुभ माना गया है, क्योंकि यह घर की सकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर वास्तु दोष पैदा करता है।
टूटे बर्तनों में भोजन करने की क्यों है मनाही?
भारतीय परंपरा और सनातन संस्कृति में भोजन को साक्षात ‘अन्नपूर्णा’ और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जिस थाली या पात्र में हम भोजन ग्रहण करते हैं, उसका शुद्ध, सुंदर और अखंडित होना अनिवार्य है। चटके हुए बर्तनों में भोजन परोसने से भोजन की सात्विकता और ऊर्जा दूषित होती है। वास्तु जानकारों का मानना है कि दरार वाले बर्तनों का इस्तेमाल करने से घर का आभामंडल (Aura) प्रभावित होता है, जिससे सदस्यों के बीच सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान रुक जाता है। इसलिए किसी भी बर्तन में जरा सी भी टूट-फूट दिखे, तो उसे रोजमर्रा के उपयोग से तत्काल अलग कर देना चाहिए।
खंडित बर्तनों से क्यों बढ़ता है राहु का अशुभ प्रभाव?
ज्योतिष और वास्तु विज्ञान में घर की टूटी-फूटी, कबाड़ और खंडित वस्तुओं का सीधा संबंध छाया ग्रह राहु से माना गया है। राहु को भ्रम, मानसिक अशांति, तनाव, अनिद्रा और अप्रत्याशित बाधाओं का कारक ग्रह माना जाता है। जब घर या रसोई में लगातार टूटे हुए बर्तन रखे रहते हैं, तो राहु की नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप परिवार के सदस्यों में अकारण चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बातों पर गृह क्लेश और आपसी मनमुटाव बढ़ने लगता है। इस अनचाहे तनाव से बचने के लिए खंडित बर्तनों को संजोकर रखने के बजाय समय रहते घर की चौखट से बाहर कर देना ही समझदारी है।
अलक्ष्मी का प्रवेश और मां लक्ष्मी की नाराजगी का कारण
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक धन की देवी मां लक्ष्मी का वास केवल उसी घर में होता है जहां स्वच्छता, सुंदरता और सुव्यवस्था का वास हो। इसके विपरीत खंडित और जीर्ण-शीर्ण सामान दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि रसोई या डाइनिंग टेबल पर टूटे बर्तनों का जमावड़ा रहने से मां लक्ष्मी रुष्ट होकर प्रस्थान कर जाती हैं और वहां दरिद्रता की देवी ‘अलक्ष्मी’ का प्रभाव बढ़ने लगता है। आर्थिक तंगी, बेवजह के खर्च और कर्ज की स्थिति से बचने के लिए भोजन के पात्रों को हमेशा चमकदार और सही स्थिति में रखना आवश्यक है।
रसोई में टूटे बर्तनों का ढेर लगाना वास्तु दोष का बड़ा कारण
वास्तु शास्त्र में रसोईघर को पूरे घर का शक्ति केंद्र (Power House) माना गया है, क्योंकि यहीं से परिवार के प्रत्येक सदस्य के स्वास्थ्य और भाग्य का निर्माण होता है। ऐसे पवित्र स्थान पर चटके मग, टूटी प्लेटें या दरार वाले कुकर-कड़ाही का ढेर लगाना गंभीर वास्तु दोष पैदा करता है। भोजन पकाने और परोसने वाले बर्तनों में आई दरारें नकारात्मक तरंगें छोड़ती हैं, जिससे घर के मुखिया की उन्नति में रुकावटें आने लगती हैं और बनते काम अंतिम समय पर बिगड़ने लगते हैं।
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चटके बर्तनों को हटाकर ऐसे व्यवस्थित रखें किचन
यदि घर की किसी क्रॉकरी, कांच के कप, फाइबर या स्टील की प्लेट में दरार आ जाए, तो उसे तुरंत बाकी बर्तनों से अलग कर दें। कई लोग ऐसे बर्तनों को अलमारी के किसी कोने में छिपाकर रख देते हैं, जबकि वास्तु के अनुसार इन्हें घर में रखना ही नहीं चाहिए। ठीक इसी तरह टूटा शीशा, बंद घड़ियां, खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और टूटी सजावटी वस्तुएं भी घर से बाहर निकाल देनी चाहिए। घर और रसोई को साफ-सुथरा व व्यवस्थित रखने से न केवल वास्तु दोष दूर होते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।



