मऊ में मंदिर परिसर में पूछताछ का वीडियो वायरल, महिला थाना प्रभारी हटाईं गईं

सुजीत कुमार मऊ
मऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में मंदिर परिसर में एक भाई-बहन से ऑन कैमरा पूछताछ करने का मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह कल्पना मिश्रा को नया महिला थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है।
यह मामला 14 दिसंबर का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार गाजीपुर जिले के रहने वाले एक भाई और बहन मऊ के शीतला माता मंदिर परिसर में घूमने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह ने दोनों को प्रेमी-प्रेमिका समझ लिया और उनसे पूछताछ शुरू कर दी। पूछताछ का यह पूरा घटनाक्रम किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
वीडियो वायरल होते ही पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। वायरल वीडियो में महिला इंस्पेक्टर युवक और युवती से यह पूछती नजर आ रही थीं कि वे कहां से आए हैं और उनके गार्जियन कहां हैं। इस पर युवक ने बताया कि वे दोनों भाई-बहन हैं, लेकिन इसके बावजूद पूछताछ जारी रही। वीडियो में इंस्पेक्टर अभिभावकों से फोन पर बात करती और बच्चों को अकेले बाहर न घूमने की हिदायत देती भी दिख रही हैं।
लोगों ने सवाल उठाया कि जब युवक बहन के साथ है तो वही उसका गार्जियन माना जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद इसे ‘मोरल पुलिसिंग’ का मामला बताया जाने लगा। लोगों का कहना था कि सार्वजनिक स्थान पर बिना किसी शिकायत या आपराधिक गतिविधि के इस तरह की पूछताछ पुलिस की मर्यादा के खिलाफ है। देखते ही देखते यह मामला चर्चा का विषय बन गया और पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन जी ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने महिला थाना प्रभारी मंजू सिंह को उनके पद से हटाते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय मऊ से संबद्ध कर दिया। इसके साथ ही कल्पना मिश्रा को नया महिला थाना प्रभारी नियुक्त किया गया। एसपी ने इस कार्रवाई की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से भी साझा की।
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोरल पुलिसिंग के नाम पर किसी के निजी जीवन में अनावश्यक दखल नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस को कानून के दायरे में रहकर, जनता के साथ मित्रवत व्यवहार करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। इस तरह की घटनाएं पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। पुलिस प्रशासन का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। वहीं, इस कार्रवाई के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही तय की जाएगी और गलत कार्यशैली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



