यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों के अच्छे दिन, मानदेय के लिए सरकार ने बनाई 4 कैटेगरी

UP contractual staff salary update: सरकारी दफ्तरों में बरसों से रीढ़ की हड्डी बनकर काम करने वाले संविदा कर्मियों के लिए आखिरकार सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का रास्ता खुल गया है। निजी ठेकेदारों के शोषण और देर से मिलने वाले कम वेतन की मार झेल रहे राज्य के लगभग तीन लाख कर्मचारियों को अब तय समय पर सम्मानजनक पारिश्रमिक मिलेगा।
शासन ने इस दिशा में संस्थागत सुधार करते हुए लखनऊ स्थित लोकभवन से ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ की विधिवत शुरुआत कर दी है। इसके साथ ही एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधिकारिक पहचान चिन्ह भी जारी कर दिया गया है। इस पूरे ढांचे का सबसे बड़ा असर यह होगा कि कर्मियों को अब योग्यता के आधार पर बीस हजार से लेकर चालीस हजार रुपये महीने का भुगतान सुनिश्चित होगा।
योग्यता के आधार पर चार स्तरों में बंटा मानदेय
विभागों से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक इस समय करीब दो लाख सत्तर हजार लोग अलग-अलग सरकारी महकमों में सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी भूमिकाओं की जिम्मेदारी और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर चार अलग-अलग वर्ग बनाए गए हैं। सबसे उच्च स्तर के विशेषज्ञों के लिए चालीस हजार रुपये मासिक तय किए गए हैं। तकनीकी और प्रशासनिक काम देखने वालों को पच्चीस हजार रुपये मिलेंगे। वहीं फील्ड और क्लेरिकल काम में लगे स्टाफ के लिए बाईस हजार रुपये तथा सहायक कर्मचारियों के लिए बीस हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
मेडिकल और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलेगा चालीस हजार रुपये का सम्मानजनक वेतन
पहले वर्ग में उच्च दक्षता और डिग्री वाले पदों को जगह दी गई है। इसमें अस्पतालों में सेवा देने वाले डॉक्टर डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापक और निर्माण से जुड़े सहायक अभियंता शामिल हैं। इनके अलावा उप प्रभागीय अधिकारी प्रोजेक्ट ऑफिसर आर्किटेक्ट लेखा अधिकारी और अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। इन सभी पेशेवरों को अब प्रतिमाह चालीस हजार रुपये की निश्चित रकम दी जाएगी जिससे सरकारी सेवाओं में उच्च योग्यता वाले युवाओं का जुड़ाव मजबूत होगा।
स्वास्थ्य और फील्ड स्टाफ के लिए पच्चीस हजार और बाईस हजार रुपये की दरें
द्वितीय वर्ग में जूनियर इंजीनियर अस्पतालों की स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इसके साथ ही वरिष्ठ लिपिक आशुलिपिक लेखाकार अनुवादक प्रशिक्षित शिक्षक और एक्स-रे जांच करने वाले कर्मियों को रखा गया है। इनके लिए पच्चीस हजार रुपये का भुगतान तय हुआ है जिसके लिए स्नातक परास्नातक अथवा तकनीकी डिप्लोमा अनिवार्य रहेगा।
तृतीय वर्ग में कार्यालयों के कंप्यूटर ऑपरेटर कनिष्ठ सहायक बिजली मिस्त्री मैकेनिक प्रयोगशाला सहायक वाहन चालक और पैरामेडिकल फील्ड स्टाफ आएंगे जिन्हें हर माह बाईस हजार रुपये मिलेंगे।
सहायक कर्मियों के लिए न्यूनतम बीस हजार रुपये और आठवीं-दसवीं पास की शर्त
कार्यालयों की बुनियादी व्यवस्था संभालने वाले सफाई कर्मचारी चपरासी अनुसेवक रसोइया सुरक्षा गार्ड माली बढ़ई और लिफ्ट ऑपरेटर जैसे पदों को चतुर्थ वर्ग में रखा गया है। इन भूमिकाओं के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता आठवीं या दसवीं रखी गई है। इस तबके को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए न्यूनतम बीस हजार रुपये का मासिक भुगतान तय किया गया है जिससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
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भर्ती में इंटरव्यू की बाध्यता खत्म
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ठेका कंपनियों द्वारा वेतन में की जाने वाली कटौती और देरी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। अब हर महीने की पांच तारीख तक मानदेय सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में भेजने की अनिवार्य शर्त रखी गई है। सभी प्रदाता एजेंसियों को एक ही केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकृत होना पड़ेगा और नियुक्तियों में सामाजिक आरक्षण के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। चयन प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए निचले दो वर्गों से साक्षात्कार पूरी तरह हटा दिया गया है जबकि उच्च पदों के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू लिया जाएगा।



