क्या खत्म होगी अमेरिका-इजरायल की दोस्ती, लेबनान और ईरान के मुद्दे पर आपस में ही भिड़े ट्रंप और नेतन्याहू

trump netanyahu call: अमेरिका और इजरायल में क्या आपसी टकराव बढ़ रहा है? क्या डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की अटूट दोस्ती में दरार पड़ चुकी है? क्या ट्रंप और नेतन्याहू की राहें अलग-अलग हो जाएंगी? क्या इजरायल अपने सबसे भरोसेमंद और मजबूत पार्टनर को खो देगा? अमेरिका-इजरायल की ‘फ्रेंडशिप’ समूची दुनिया में मशहूर है, मगर पिछले कुछ दिनों से अटूट भरोसे एवं दोस्ती का यह बंधन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। इसकी वजह डोनाल्ड ट्रंप हैं। हाल-फिलहाल में वह एक नहीं बल्कि दो बार फोन वार्ता के दरम्यान बेंजामिन नेतन्याहू पर भड़क चुके हैं।

दोस्तों को भी नहीं बख्शते ट्रंप

वैसे ट्रंप का मिजाज कब आक्रामक हो जाएगा, कोई नहीं जानता। वह दुश्मनों के साथ-साथ दोस्तों को भी नहीं बख्शते हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की संग भी वह बुरी तरह लड़ पड़े थे। व्हाइट हाउस में वार्ता के दरम्यान ट्रंप ने जेलेंस्की को झिड़क दिया था। यही नहीं जेलेंस्की को निराश होकर वहां से स्वदेश लौटना पड़ा था। ट्रंप और नेतन्याहू के मध्य की ताजा नोकझोंक ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। खबरों के मुताबिक लेबनान के मुद्दे पर दोनों नेताओं में तनातनी चल रही है।

जानकारों के मुताबिक टेलीफोन पर बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा ‘तुम तो बिल्कुल पागल हो। यदि मैं न होता तो तुम अब तक जेल में होते। मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं। अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। तुम्हारी वजह से अब हर कोई इजरायल से नफरत करता है।’ निश्चित रूप से ट्रंप का यह बर्ताव नेतन्याहू को पसंद नहीं आया होगा। जवाब में उन्होंने भी कुछ कड़वी बातें जरूरी कही होंगी।

खराब दौर से गुजरने को मजबूर है ट्रंप का देश

मिडिल ईस्ट जंग में फंसा अमेरिका इन दिनों खराब दौर से गुजरने को मजबूर है। ईरान द्वारा सरेंडर न करने के कारण अमेरिका की खूब जग हंसाई हो रही है। मिडिल ईस्ट में बेशक युद्ध विराम चल रहा है, मगर बीच-बीच में आसमानी हमले होने की खबरें सामने आ रही हैं। लेबनान में इजरायल निरंतर बमबारी कर रहा है। नतीजन लेबनान की जनता पलायन करने को विवश है।

इजरायल का साफ कहना है कि हिज्बुल्लाह अभी भी खतरा है और ईरान पर भरोसा करना संभव नहीं है। वह तब तक युद्ध चाहते हैं जब तक ईरान का खतरा पूरी तरह खत्म ना हो जाए। जबकि ट्रंप लेबनान में इजरायल के आक्रामक रूख से नाराज हैं। हिज्बुल्लाह के प्रति इजरायल की नीति में कोई परिवर्तन नहीं आया है। अमेरिका के लिए इजरायल से अलग होना मुमकिन नहीं है। दोनों देशों का सैन्य सहयोग बना रहेगा। इजरायल की सुरक्षा के लिए अमेरिका का समर्थन बुनियादी तौर पर नहीं बदला है। ट्रंप के प्रशासन में इजरायल का काफी ज्यादा दबदबा है। इजरायली लॉबी से टक्कर लेना ट्रंप के लिए संभव नहीं है।

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व्हाइट हाउस जानता है कि ट्रंप भविष्य में चले जाएंगे, मगर इजरायली लॉबी का प्रभाव नहीं। हालांकि ट्रंप और नेतन्याहू के मध्य का ये झगड़ा कोई वैचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक है। इजरायल ईरान युद्ध को आगे बढ़ाना चाहता है। व्हाइट हाउस हर हाल में युद्ध खत्म करना चाहता है। इजरायल का मानना है कि हिज्बुल्लाह जैसे चरमपंथी संगठनों को ईरान का समर्थन मिल रहा है। नतीजन ये संगठन आए दिन इजरायल पर हमले कर रहे हैं। फिलहाल ट्रंप और नेतन्याहू की लड़ाई सुर्खियां बटोर रही है। ईरान पर हमले के पीछे जिन चुनिंदा देशों ने अमेरिका पर दबाव बनाया था उनमें इजरायल व सऊदी अरब आदि शामिल थे।

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