अब हाईवे टोल से बचकर निकलना नामुमकिन, सरकार ने नया नियम लागू किया; जेब पर भारी पड़ने वाला है

Toll Rules 2026: अगर आप नेशनल हाईवे पर यात्रा करते समय टोल देने में लापरवाही बरतते रहे हैं, तो अब सावधान होने का समय आ गया है। सरकार ने टोल वसूली को और भी सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए एक नया नियम लागू किया है। यह नियम 17 मार्च, 2026 से लागू हो गया है। इस नियम के तहत, अगर आप टोल नहीं देते हैं, तो अब आपको दोगुनी रकम चुकानी पड़ सकती है।
सरकार ने ‘नेशनल हाईवे फीस (दरों का निर्धारण और वसूली) दूसरा संशोधन नियम, 2026’ बनाया है। इन नियमों के तहत, ‘अदा न की गई यूज़र फीस’ (Unpaid Toll) की एक नई परिभाषा तय की गई है। अगर कोई गाड़ी इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम में दर्ज होती है, मगर उसका टोल पेमेंट नहीं मिलता है, तो उसे ‘अदा न किया गया टोल’ (Unpaid Toll) माना जाएगा।
E-Notice के ज़रिए वसूली
अब टोल न देने वालों की पहचान करने और उन पर नज़र रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे मामलों में, गाड़ी के मालिक को एक ‘E-Notice’ भेजा जाएगा। इस नोटिस में गाड़ी, तारीख, जगह और बकाया रकम से जुड़ी सारी जानकारी होगी। यह नोटिस SMS, ईमेल या मोबाइल ऐप के ज़रिए भेजा जाएगा, और इसे एक ऑनलाइन पोर्टल पर भी देखा जा सकेगा।
समय पर पेमेंट करने वालों को बड़ी राहत
सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए एक खास नियम भी शामिल किया है। अगर आप E-Notice मिलने के 72 घंटों के अंदर बकाया टोल रकम चुका देते हैं, तो आपको सिर्फ़ मूल टोल रकम ही चुकानी होगी। मगर, अगर आप तय समय सीमा खत्म होने के बाद पेमेंट करते हैं, तो आपको टोल की दोगुनी रकम चुकानी पड़ेगी।
शिकायत दर्ज करने का मौका
अगर किसी गाड़ी के मालिक को लगता है कि उन्हें मिला नोटिस गलत है, तो उनके पास 72 घंटों के अंदर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का विकल्प है। सरकार के लिए यह ज़रूरी है कि वह ऐसी शिकायतों को 5 दिनों के अंदर सुलझाए। अगर शिकायत 5 दिनों के अंदर नहीं सुलझती है, तो जुर्माना अपने आप माफ हो जाएगा।
15 दिनों के बाद सख्त कार्रवाई
अगर टोल नहीं चुकाया जाता है और 15 दिनों के अंदर कोई शिकायत भी दर्ज नहीं की जाती है, तो बकाया रकम गाड़ी के सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर ली जाएगी। इसके बाद गाड़ी से जुड़ी कई ज़रूरी सेवाओं- जैसे कि रजिस्ट्रेशन, मालिकाना हक का ट्रांसफर, या दूसरे प्रशासनिक कामों—पर रोक लगाई जा सकती है।
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यह बदलाव क्यों ज़रूरी है?
सरकार का कहना है कि यह कदम टोल वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, नियमों का पालन सुनिश्चित करने और हाईवे के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए उठाया गया है। इसके अलावा, इस पहल से एक बाधा-मुक्त टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा मिलने और निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।



