सुखदेव जन्म-कुंती स्तुति प्रसंग ने किया भावविभोर
नगला राम सुंदर में श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ी श्रद्धा

जसवंतनगर,इटावा। क्षेत्र के ग्राम नगला राम सुंदर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वातावरण हरि-नाम के जयघोष से गूंज उठा और पूरा ग्राम भक्ति की धारा में सराबोर हो गया। कथा का वाचन कर रहे सरस एवं प्रख्यात कथा वाचक पंडित सागर दास जी महाराज ने श्रीमद् भागवत के पावन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को अध्यात्म के सागर में डुबो दिया।
महाराज श्री ने इस दिन विशेष रूप से सुखदेव जी के जन्म, कुंती स्तुति, युधिष्ठिर चिंता, विदुर चरित्र और सृष्टि वर्णन जैसे प्रेरक प्रसंगों की अमृतमयी व्याख्या की। उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास के तप, कर्तव्य और संकल्प से देवात्मा बालक रूप में प्रकट हुए सुखदेव जी जन्म से ही ब्रह्मज्ञान से संपन्न थे। उनके जन्म के साथ ही समूचे ब्रह्मांड में दिव्य ध्वनियाँ गूंजीं और सनातन धर्म में ज्ञान का नया प्रकाश फैल गया।
कुंती स्तुति के प्रसंग में महाराज जी ने मां कुंती की भक्ति, विनम्रता और जीवन के प्रति कृतज्ञता का अद्भुत चित्रण किया।
उन्होंने कहा कि विपत्ति में भी भगवान के प्रति समर्पण सच्चे भक्त की पहचान है। युधिष्ठिर चिंता और विदुर चरित्र के माध्यम से उन्होंने धर्म, नीति और सत्य के पालन का संदेश दिया, वहीं सृष्टि वर्णन में भगवान की सृजन लीला का अद्भुत वर्णन किया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
महाराज जी ने राजा परीक्षित की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी विनम्रता और धर्मशीलता ने उन्हें अद्वितीय श्रवणकर्ता बनाया, जिसके कारण श्रीमद् भागवत का अमृत मानवता तक पहुंचा। कथा आयोजन में श्रीमती प्रकाश सिंह और विश्वनाथ सिंह तोमर,व्यवस्था पक राजीव तोमर की प्रमुख भूमिका रही। कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति में लीन होकर दिव्य रस का आनंद लिया।



