भारत से लौटते ही पुतिन के लिए अच्छी खबर, रूस को मिला बड़ा ऑफर; अमेरिका की नींद उड़ी
Russia Naval Base in Africa: पुतिन के भारत से लौटते ही रूस को मिली बड़ी खबर! सूडान ने हिंद महासागर के रेड सी पर नेवल बेस बनाने का दिया ऑफर।

Russia Naval Base in Africa: रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन भारत का 2 दिन का दौरा पूरा करके स्वदेश लौट आए हैं। भारत से लौटते ही पुतिन को अच्छी खबर मिली। रूस को हिंद महासागर में बेस मिल सकता है। जिससे सीधे तौर पर अमेरिका की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
हिंद महासागर के रेड सी कोस्ट पर सूडान नाम का एक देश है। सूडान की मिलिट्री सरकार ने रूस को एक ऐसा प्रपोज़ल दिया है जो अफ्रीकी मिडिल ईस्ट की जियोपॉलिटिक्स को बदल सकता है। यह रिपोर्ट वॉल स्ट्रीट जर्नल में पब्लिश हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूडान ने रूस को रेड सी कोस्ट पर सैनिक और वॉरशिप तैनात करने का अधिकार देने का बड़ा ऑफर दिया है। सूडान ने यह ऑफर रूस को दिया है, लेकिन वे बदले में कुछ और भी चाहते हैं।
सूडान को क्या चाहिए रूस से
इस ऑफर के बदले में सूडान रूस से एडवांस्ड हथियार, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और मिलिट्री इक्विपमेंट मांग रहा है। सूडानी फॉरेन मिनिस्ट्री ने फरवरी में इशारा किया था कि सरकार रूस को नेवल फैसिलिटी बनाने की इजाज़त देने के लिए तैयार है। लेकिन उस समय शर्तें साफ नहीं थीं।
अब यह बात सामने आई है कि रूस को पोर्ट सूडान या रेड सी में कहीं और न्यूक्लियर पावर वाले जहाजों समेत 300 सैनिकों और चार वॉरशिप को तैनात करने की इजाज़त देने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। रूस पिछले पांच सालों से ऐसी स्ट्रेटेजिक लोकेशन की तलाश में है।
सीरिया में बशर अल-असद का राज खत्म होने के बाद रूस ने मेडिटेरेनियन में अपनी मिलिट्री प्रेजेंस काफी कम कर दी थी। उस समय, रेड सी में जगह बनाना रूस के लिए स्ट्रेटेजिक रूप से बहुत फायदेमंद माना जा रहा था। क्योंकि यह इलाका हिंद महासागर, स्वेज नहर और बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट को जोड़ता है, जिससे दुनिया का एक बड़ा ट्रेड गुजरता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूडान की मिलिट्री पोजीशन लगातार कमजोर होती जा रही है। सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच 2023 में शुरू हुए संघर्ष ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया है और हजारों लोगों की जान ले ली है।
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इस मामले में सूडानी सरकार रूस से मिलिट्री मदद लेना बहुत ज़रूरी मानती है। पश्चिमी देशों और यूरोपियन यूनियन से ऐसे हथियार मिलना लगभग नामुमकिन है, जिससे रूस सबसे सही ऑप्शन बन जाता है।
रूस को होगा बड़ा फायदा
अगर यह डील हो जाती है, तो रूस को न सिर्फ़ लाल सागर तक परमानेंट मिलिट्री एक्सेस मिल जाएगा, बल्कि सूडान की सोने की खदानों और दूसरे रिसोर्स पर भी शुरुआती अधिकार मिल जाएंगे। रूस ने पहले ही अफ्रीका के कई देशों के साथ सिक्योरिटी कोऑपरेशन बढ़ाया है, और यह मिलिट्री बेस उस स्ट्रैटेजी को और मज़बूत करेगा।
अमेरिका और उसके साथी इस संभावित डील को लेकर परेशान हैं, क्योंकि यह वही इलाका है जहां चीन पहले से ही जिबूती में एक विदेशी नेवल बेस ऑपरेट करता है, और जहां अमेरिका का भी एक बेस है। रूस की एंट्री इस समुद्री कॉरिडोर में एक नया बैलेंस बना सकती है। अभी यह साफ़ नहीं है कि यह नेवल फैसिलिटी कब तैयार होगी, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि युद्ध के दबाव में सूडान जल्द से जल्द रूस के साथ एक एग्रीमेंट करना चाहता है।



