डॉक्टर नहीं बनना था तो बेटे ने पिता के कर दिए टुकड़े, उधर दो सगी बेटियों ने क्यों रेत दिया पिता का गला
रिश्तों का कत्ल- आधुनिक समाज में युवाओं की सोच बदल चुकी है। वह मनमुताबिक करियर बनाने और जीवन जीने की आजादी चाहते हैं। बात चाहें करियर की हो या पर्सनल लाइफ की, उन्हें दूसरों की सलाह व दखलंदाजी कतई पसंद नहीं है। इसके बावजूद दबाव बनाए जाने पर वह इंसान से शैतान बन जाते हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ और मुजफ्फरनगर में प्रकाश में आए दो मामलों ने युवाओं की घातक सोच को न सिर्फ उजागर किया है बल्कि आपसी रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है।
बेटे ने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी
लखनऊ में बीकॉम के छात्र ने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में शव के टुकड़े कर दिए गए। शव के कुछ टुकड़े ठिकाने लगा दिए गए। जबकि कुछ टुकड़े नीले ड्रम में भरकर छिपा दिए गए थे। पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस हृदय विदारक घटना ने लखनऊ में एकाएक सनसनी फैला दी। बदमिजाज बेटे ने यह दुस्साहस इसलिए किया, क्योंकि पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। छात्र के पिता का पैथोलॉजी का कारोबार था। इसके इतर हत्यारोपी अपना अलग कारोबार करने की ख्वाहिश रखता था।
दो सगी बेटियों ने पिता के गर्दन रेती
उधर, मुजफ्फरनगर में दो सगी बेटियों ने पिता की गला रेतकर हत्या कर दी। पिता द्वारा निरंतर टोका-टोकी किए जाने से तंग आकर बेटियों ने यह कदम उठाया। उन्हें व्यक्तिगत जिंदगी में किसी का दखल पसंद नहीं था। बच्चों के लिए माता-पिता भगवान से कम नहीं होते हैं। वह हमेशा बच्चों की भलाई चाहते हैं। इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, मगर बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो उन्हें माता-पिता की सलाह और रोका-टोकी रास नहीं आती। ज्यादा पाबंदियां लगाए जाने पर वह शैतानी रूप अख्तियार कर लेते हैं।
राजधानी लखनऊ और मुजफ्फरनगर की घटनाओं को सभ्य समाज कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता है। वैसे प्रतिस्पर्धी युग में बच्चों पर अच्छा करियर बनाने का खासा दबाव रहता है। इसके चलते वह अक्सर डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं।
मौजूदा दौर में युवा पीढ़ी निश्चित रूप से अकादमिक दबाव, करियर की अनिश्चितता, सोशल मीडिया के प्रभाव और व्यक्तिगत रिश्तों की जटिलताओं के कारण गंभीर मानसिक तनाव का सामना करने को मजबूर है। यह तनाव अवसाद, अनिद्रा, शारीरिक बीमारियों और कम प्रदर्शन का कारण बन रहा है। इसके प्रबंधन के लिए संतुलित जीवनशैली, योग, संवाद और उचित समय प्रबंधन जरूरी है। युवाओं में कम उम्र से सफल करियर बनाने का भारी दबाव होता है। हर कोई सबसे आगे निकलना चाहता है, जिससे परीक्षा का तनाव, अंकों की चिंता और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें मानसिक रूप से थका देती है। यह दबाव इतना अधिक होता है कि कई बार वे अपनी पसंद और रूचि को भी अनदेखा कर देते हैं।
घर मेरा, कब्जा प्रेमी का; पत्नी की हरकतों से परेशान पति की आपबीती सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे
मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से होता है। जंक फूड का अधिक सेवन, रात में देर तक जागना, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव युवाओं के दिमाग और शरीर दोनों को प्रभावित करता है। ये आदतें न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी कमजोर करती हैं। कुछ माह पहले प्रकाश में आए सर्वे ने बड़ी चिंता उत्पन्न की थी।
सर्वे में सामने आया था कि देश में लगभग सत्तर प्रतिशत युवा तनाव और एंग्जायटी से जूझ रहे हैं। जबकि साठ प्रतिशत से ज्यादा छात्र डिप्रेशन के लक्षणों का सामना कर रहे हैं। अलबत्ता युवाओं की मानसिकता का ध्यान रखने की आवश्यकता है। किसी बात के लिए बार-बार दबाव बनाए जाने पर वह आवेश में आकर गलत कदम उठाने से भी नहीं चूकते हैं।



