डिजिटल माध्यम से शिक्षा की अलख जगा रहीं रिचा पांडेय
परिषदीय विद्यालयों में जाकर डिजिटल बोर्ड पर दे रहीं शिक्षा

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को तकनीकी माध्यम से बेहतर ढंग से पढ़ाने के उद्देश्य से लखनऊ की रिचा पांडेय विद्यालयों की डेहरी पर पहुँच रहीं हैं। बच्चों को डिजिटल माध्यम से बेहतर ढंग से पढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने स्मार्ट पढ़ाई शुरू की है। एनिमेटेड वीडियो, प्रेजेंटेशन (पीपीटी) इन्फोग्राफिक्स, फ्लैश कार्ड जैसी आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करके बच्चों को गहराई से पढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।
लखनऊ की रिचा पाण्डेय विदेशों में शिक्षकों को दक्ष करने वाली संस्था से जुड़ी हैं और वर्तमान में एआई व अन्य माध्यम से बच्चों को तकनीकी रूप से दक्ष बना रही है। लखनऊ जिले के गोसाईगंज ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिलवर में उन्होंने तीन दिनों तक बच्चों को डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाकर बच्चों के अंदर एक अलख जगाई। उन्होंने बताया कि बच्चों को स्मार्ट क्लास के माध्यम से शिक्षा देने में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। उन्होंने बताया कि पहले दिन बच्चों की संख्या कम थी लेकिन जैसे ही बच्चों को यह जानकारी हुई कि स्मार्ट क्लॉस के माध्यम से रोचक पढ़ाई कराई जा रही है दूसरे दिन काफी संख्या में बच्चे बढ़ गए। उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक काफी संख्या में बच्चे क्लॉस में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के गिरते स्तर और संसाधनों के अभाव के बीच, इस विद्यालय ने डिजिटल शिक्षा की दिशा में एक नई पहल की है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में डिजिटल बोर्ड स्थापित किए गए हैं, जिससे छात्र आधुनिक तरीके से पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर कंटेंट और रोचक पढ़ाई कराकर बच्चों को अपनी तरफ आकर्षित किया जा सकता है। यह सुविधा उन बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी जो आर्थिक अभाव के कारण महंगे निजी विद्यालयों में प्रवेश नहीं ले पाते थे।
समाजसेवा करने वाली रिचा पांडेय ने यूपी सरकार और शिक्षा विभाग से नई पहल को प्रोत्साहित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि डिजिटल बोर्ड के माध्यम से पढ़ाई अब केवल किताबें तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चे वीडियो और एनिमेशन की मदद से कठिन विषयों को अधिक रोचक और प्रभावी ढंग से समझ पाएंगे। इससे विज्ञान और गणित जैसे जटिल सिद्धांतों को समझना आसान होगा। डिजिटल बोर्ड के उपयोग से कक्षा में बच्चों की भागीदारी बढ़ेगी। शिक्षकों के लिए भी नवीनतम ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करना आसान होगा। अभिभावकों पर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के उनके बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्राप्त होगी।



