कंगाल पाकिस्तान के ‘मुंगेरीलाल वाले सपने’: खाने को दाने नहीं, और करने चले भारत को तबाह

पाकिस्तान को तय करना होगा कि वह ‘भूगोल का हिस्सा रहेगा या इतिहास बनना चाहेगा।’ भारत के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी की यह टिप्पणी ध्यान देने योग्य है। द्विवेदी का यह बयान पाकिस्तान के प्रति भारत के दृष्टिकोण और भविष्य की रणनीति को दर्शाने के लिए काफी है। इसमें दो राय नहीं कि भारतीय सेना यदि ठान ले तो दुनिया के मानचित्र से पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा।
परमाणु बटन दबाने का मौका भी नहीं मिलेगा
जल-थल और आसमान से एक साथ आक्रमण होने की स्थिति में पड़ोसी मुल्क को संभलने का मौका तक नहीं मिल पाएगा। जिन परमाणु हथियारों का दम वह भरता रहता है, उन्हें चलाने का समय भी नहीं मिल सकेगा। जनरल उपेंद्र द्विवेदी की टिप्पणी के बाद सीमा पार से जुबानी हमले शुरू हो गए हैं। तिलमिलाया और बौखलाया पड़ोसी हर बार की तरह जुबानी जमा खर्च करने लगा है। हमारे नालायक एवं दुष्ट पड़ोसी ने अपने न्यूक्लियर पावर होने, दुनिया में बढ़ते रसूख की दुहाई दे डाली है।
पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) ने बयान जारी कर गीदड़भभकी दी है कि वह (भारत) दक्षिण एशिया को एक और संघर्ष की तरफ न धकेले, क्योंकि परिणाम पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकते हैं। मसलन पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत को आंखें दिखानी शुरू कर दी हैं। विभाजन के बाद से भारत और पाक के रिश्तों में तल्खी का सिलसिला जारी है।
सभी जानते हैं कि सीधी लड़ाई लड़ने में वह सक्षम नहीं है। इसलिए आतंकवाद का रक्षा कवच पाकिस्तानी सेना ने तैयार कर रखा है। आतंकियों के जरिए वह भारत को अस्थिर करने की साजिश में दिन-रात मशगूल रहता है। अमेरिका और चीन संग संबंधों को मजबूती मिलने से पाकिस्तान के हुक्मरान गदगद नजर आते हैं। दुनिया जानती है कि अमेरिका पर भरोसा करना अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। वह ‘यूज एंड थ्रो’ की नीति अपनाता है। जबकि चीन अपनी विस्तारवादी नीति और दूसरों को कर्ज के मकड़जाल में फंसाने के लिए बदनाम है। इस्लामाबाद टॉक के नाम पर पाकिस्तान ने खुद की छवि सुधारने की भरपूर कोशिश की।
इस्लामाबाद टॉक से अमेरिका और ईरान के बीच की दूरियां तो कम नहीं हुईं, मगर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ व सेना प्रमुख असीम मुनीर की जगहंसाई जरूर हो गई। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने पाकिस्तान को यह अहसास दिला दिया है कि किसी भी प्रकार की बड़ी हरकत कर वह अब शांति से नहीं बैठ सकेगा। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के हौसले पस्त हो चुके हैं।
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अलगाववादी नेताओं और पत्थरबाजों की मनमानी के दिन भी गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। कश्मीर में पाकिस्तान के इशारे पर हमेशा माहौल बिगाड़ा जाता था। कुछ दिन पहले पंजाब में दो स्थानों पर बम धमाके हुए थे। इसमें पाकिस्तान का हाथ होने की आशंका जाहिर की गई। पड़ोसी मुल्क के आंतरिक हालात बद से बदतर हैं। विकास, आर्थिक, शैक्षिक, चिकित्सा जैसे मोर्चों पर वह औंधे मुंह गिरा पड़ा है। महंगाई चरम सीमा पर है। सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार रूक नहीं पाया है।
बलूचिस्तान हाथ से गया
विदेशी कर्ज दिन दूरी और रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। अफगानिस्तान ने अलग से मोर्चा खोल रखा है। बलूचिस्तान का अधिकांश इलाका पाकिस्तान के हाथ से जा चुका है। केपी प्रांत में हालात निरंतर पेचीदा हो रहे हैं। यूएई का कर्ज चुकाने में पाकिस्तानी हुक्मरानों की सांस फूल गई थी। तमाम विषम परिस्थितियों से जूझने के बाद भी वह भारत को तबाह करने के मुंगेरीलाल के सपने देखना नहीं छोड़ सका है।



