नेतन्याहू का ‘वीटो बम’, जाने क्यों कभी नहीं बनेगा फिलिस्तीन राष्ट्र

गाजा में हालिया युद्धविराम के बाद अब अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने एक नया प्रस्ताव रखने की तैयारी में है जिसमें फिलिस्तीन राष्ट्र को लेकर महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं। लेकिन मतदान से पहले ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि वह फिलिस्तीन राष्ट्र की अवधारणा को किसी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे। वह लगातार कहते आए हैं कि ऐसा होने पर हमास को फायदा मिलेगा और इजराइल की सीमाओं के पास एक और ताकतवर ढांचा खड़ा हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय नेतन्याहू पर नरमी दिखाने के लिए जोर डाल रहा है। खासकर तब जब अमेरिका गाजा में संघर्ष विराम को स्थायी रूप देने की कोशिशें तेज कर चुका है। माना जा रहा है कि सुरक्षा परिषद में जिस प्रस्ताव पर वोटिंग हो सकती है उसमें रूस, चीन और कई अरब देशों की असहमति के बावजूद गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय बल की तैनाती की बात शामिल होगी।
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हमास और अन्य फिलिस्तीनी संगठन पहले ही इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। रविवार को जारी उनके बयान में कहा गया कि यह कदम गाजा पर विदेशी नियंत्रण थोपने जैसा है और इससे फिलिस्तीनियों को अपने मामलों पर फैसला लेने का अधिकार खत्म हो जाएगा। इन गुटों ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बल में इजराइल की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए और इसकी निगरानी सीधे संयुक्त राष्ट्र के हाथ में रहे।
बयान में अमेरिकी सुझावों के उस हिस्से को भी खारिज किया गया जिसमें गाजा को निरस्त्र करने और हमास को कमजोर करने की बात की गई थी। इसी संदर्भ में नेतन्याहू ने अपने मंत्रियों से कहा कि गाजा को हथियारों से मुक्त करने की प्रक्रिया किसी न किसी रूप में पूरी होगी। उनके शब्दों में यह काम या तो सरल तरीके से होगा या फिर कठिन रास्ते से।



