अपराधियों की खैर नहीं! मेरठ की वारदात पर सीएम योगी सख्त, अब शुरू होगा ‘बाबा का इंसाफ’
Meerut Crime News: मेरठ में हत्या और अपहरण की सनसनीखेज वारदात ने कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती दे डाली है। जिन्हें योगी सरकार की अपराध नियंत्रण की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर भरोसा है, उन्हें फरार अपराधियों का अंजाम मालूम है। देर सवेर अपराधी पुलिस की गिरफ्त में होंगे, मगर ताजा हालात वाकई चिंताजनक हैं। मेरठ से लखनऊ तक सियासी हलचल बढ़ गई है। विपक्ष ने सत्ता पक्ष के खिलाफ मोर्चाबंदी शुरू कर दी है।
समाजवादी पार्टी (सपा), आजाद समाज पार्टी (आसपा) और भीम आर्मी मैदान में कूद चुकी है। पुलिस विभाग की टेंशन बढ़ रही है। एक तरफ अगवा युवती को सकुशल बरामद कर अपराधियों को दबोचने का दबाव है, दूसरी ओर क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था को बनाए रखने की चुनौती भी है। विपक्ष इस मामले को दलित बनाम ठाकुर का रंग देकर आग में घी डालने का काम कर रहा है। ऐसे में पुलिस-प्रशासन की सांस फूलने लगी है।
सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ा गांव की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ आरोपियों ने आवेश में आकर मां की हत्या कर बेटी को अगवा कर लिया। जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल महिला की निजी अस्पताल में मौत होने से मामला ज्यादा पेचीदा हो गया है। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ कर जमकर हंगामा किया।
धूम-3 स्टाइल में चोरी, एक दुकान पर बैठता था, दूसरा करता था चोरी
आरोपियों ने जिस प्रकार का दुस्साहस किया, वह कतई क्षम्य नहीं है। इस कृत्य के लिए उन्हें कानून के अनुसार सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। ठाकुर बाहुल्य कपसाड़ा गांव में एक दलित परिवार के साथ इस प्रकार की घटना से हर कोई स्तब्ध है। गांव में अब से पहले इस तरह की कोई घटना पूर्व में नहीं हुई। इस मामले में विपक्ष जिस प्रकार की आक्रामकता दिखा रहा है, उससे क्षेत्र की शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामले को जातीय रंग देने की बजाए पुलिस-प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए।
सपा, आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के तल्ख तेवरों से क्षेत्र में शांति कायम रखने के प्रयासों पर पानी फिर सकता है। वैसे इस घटना के बाद से दलित समाज में गलत संदेश जरूर गया है। इसका लाभ उठाने को विपक्ष आतुर दिखाई पड़ रहा है। निश्चित रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लिया होगा। संगीन वारदात पर सीएम कड़क फैसला लेने के लिए जाने जाते हैं। अलबत्ता आरोपियों का आसानी से बच निकलना कतई संभव नहीं है। विपक्ष को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे क्षेत्र में जातीय तनाव को बढ़ावा मिले।
सरकार को घेरने का मिला नया हथियार
कपसाड़ा की घटना के बहाने विपक्ष को सरकार को घेरने का नया हथियार मिल चुका है। वह सरकार पर एक जाति विशेष के प्रति झुकाव रखने का आरोप पहले से लगाता रहा है। अलबत्ता सरकार के समक्ष भी यह अग्नि परीक्षा का समय माना जा रहा है। योगी सरकार में संगीन अपराधों का ग्राफ तेजी से नीचे आया है। यह संभव नहीं कि समाज में कोई संगीन वारदात न घटे।
अपराधियों का मनोबल तोड़ने की मुहिम निरंतर जारी रहनी चाहिए ताकि भविष्य में भी अच्छे परिणाम हासिल हो पाएंगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि मेरठ पुलिस इस मामले में इस प्रकार की प्रभावी कार्रवाई करेगी, जिससे पीड़ित पक्ष को राहत मिल सके। हालांकि पीड़ित परिवार को जो असहनीय दर्द मिला है, वह कभी दूर नहीं हो सकेगा।



