इस देश में कत्लेआम: 80 से ज्यादा मौतें, हर तरफ तबाही का मंजर

Mali Bomb Blast 2026: माली के ग्रामीण इलाकों में हाल के दिनों में जिहादी हमलों ने आम लोगों की जिंदगी को भारी प्रभावित किया है। अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 70 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ अधिकारियों का अनुमान है कि हताहतों की संख्या 80 से भी अधिक हो सकती है। इन हमलों की जिम्मेदारी अल-कायदा से जुड़े संगठन जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (JNIM) ने ली है।
शुक्रवार को संगठन ने कई हमलों को अंजाम दिया। इससे पहले बुधवार को भी ग्रामीण इलाकों में हमला हुआ, जिसमें लगभग 30 लोग मारे गए। माली के सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक JNIM उन गांवों को निशाना बना रहा है, जिन्होंने स्थानीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने से इंकार किया।
हमलों से इलाके में दहशत का माहौल
इन हमलों ने स्थानीय समुदायों में भय और नाराजगी पैदा कर दी है। समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, एक युवा नेता ने कहा कि लोगों ने बार-बार मदद मांगी लेकिन सेना ने हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने बताया कि लोग अपने प्रियजनों की हताहतियों से टूट चुके हैं और अब सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं करते।
जेल पर हमला और बढ़ती धमकियां
हिंसा की घटनाएं तब और बढ़ गईं जब हथियारबंद लड़ाकों ने केनीरोबा सेंट्रल जेल पर हमला किया। यह जेल बामको से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है और इसमें 2,500 कैदी बंद हैं। इनमें कम से कम 72 ऐसे कैदी हैं जिन्हें अत्यधिक खतरनाक माना गया है।
साथ ही JNIM ने राजधानी बामको की ओर जाने वाली सड़कों पर चेकपॉइंट लगाने और शहर की घेराबंदी की योजना बनाने की धमकी दी है। इससे राजधानी की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
सैन्य स्थिति और गठबंधन
माली सेना के कमांडर जिब्रिला मैगा ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खतरा अभी भी बना हुआ है। अप्रैल में हमलों में तेजी आई थी, जब JNIM ने कथित तौर पर तुआरेग बहुल अजावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) के साथ सहयोग किया।
इस दौरान माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की हत्या हुई और माली के नेतृत्व के साथ खड़े रूसी सैनिकों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरी शहर किडल से पीछे हटना पड़ा।
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माली सेना का दावा है कि वह विद्रोहियों को रोकने के लिए अभियान चला रही है, लेकिन लगातार बढ़ती मौतों और हमलों की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया है।



