सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि इन 9 देशों में भी फ्यूल की कमी, 2 लीटर ईंधन की लिमिट तय

Iran Isreal US War 2026: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से भारत समेत कई बड़े देश फ्यूल संकट का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान, फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी, पोलैंड, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया भी फ्यूल की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट के खाड़ी देशों में युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन को बिगाड़ दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कच्चे तेल की कीमत 25 परसेंट बढ़ गई है। इस स्थिति को कंट्रोल करने के लिए सरकार को स्कूल बंद करने और सरकारी काम कम करने जैसे फैसले लेने पड़ रहे हैं। डिमांड और सप्लाई के बीच अनिश्चितता ने भी नागरिकों में चिंता फैला दी है। लोग फ्यूल बचाने के लिए लाइनों में खड़े हैं। पाकिस्तान में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और सरकारी ऑफिसों को 4 दिनों के लिए घर से काम करना ज़रूरी कर दिया गया है।
बांग्लादेश ने भी दोपहिया वाहनों के लिए 2 लीटर फ्यूल की लिमिट तय कर दी है। फ्रांस और पोलैंड में भी घबराए हुए लोग पेट्रोल पंपों पर लाइन लगा रहे हैं। लोग बढ़ती महंगाई से डरे हुए हैं। वियतनाम में पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में संघर्ष से ग्लोबल ट्रेड को नुकसान हो रहा है। दुनिया का लगभग 31 परसेंट कच्चा तेल और LPG गैस होर्मुज स्ट्रेट से एक्सपोर्ट होता है। जंग ने इस रास्ते को रोक दिया है, जिससे दुनिया में एनर्जी का संकट पैदा हो गया है। अगर यह लड़ाई लंबे समय तक चली तो कच्चे तेल की कीमत 120 से 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी। इससे ग्लोबल स्टॉक मार्केट में भी उलटफेर होगा।
इन देशों मची अफरा तफरी
पाकिस्तान में हालात बहुत खराब हो गए हैं। फ्यूल बचाने के लिए यहां की सरकार ने स्कूलों में 2 हफ्ते की छुट्टी कर दी है। सरकारी ऑफिस भी सिर्फ 4 दिन खुलेंगे। बांग्लादेश में टू-व्हीलर के लिए 2 लीटर और कार के लिए 10 लीटर पेट्रोल की लिमिट लगा दी गई है। पेट्रोल की जमाखोरी रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं।
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इस बीच, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपियन देशों में भी तेल की कीमतों ने लोगों की कमर तोड़ दी है। फ्रांस में भविष्य की चिंता में लोगों ने पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लगा ली हैं। जर्मनी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। पोलैंड में भी हालात तनावपूर्ण हैं।



