LPG खत्म? 10 साल बाद फिर लौटा ‘मिट्टी का तेल’, जानिए मोदी सरकार ने क्यों बदला नियम

Lpg gas crisis in india: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब धीरे-धीरे भारत में भी दिखाई देने लगा है। खासकर रसोई गैस यानी एलपीजी की आपूर्ति को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने अस्थायी तौर पर कुछ वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल की अनुमति दी है ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा करने में कोई बड़ी परेशानी न आए।

सरकार ने केरोसिन और कोयले जैसे ईंधनों के सीमित उपयोग की अनुमति दी है। हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें सामने आईं जिनमें लोगों ने गैस आपूर्ति को लेकर आशंका जताई। इन परिस्थितियों के बाद सरकार ने स्थिति को संतुलित रखने के लिए यह कदम उठाया है।

सरकार का दावा – गैस की कमी नहीं

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि देश में एलपीजी की वास्तविक कमी नहीं है। भारत की रिफाइनरी कंपनियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। कच्चा तेल अलग-अलग देशों से मंगाया जा रहा है और सप्लाई चेन को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

फिर भी एहतियात के तौर पर वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य केवल आपूर्ति पर दबाव कम करना है ताकि जरूरत पड़ने पर व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

एलपीजी वितरण पर लगाए गए नए नियम

गैस की उपलब्धता को संतुलित रखने के लिए सरकार ने एलपीजी वितरण से जुड़े कुछ नियम भी लागू किए हैं।

  • व्यावसायिक संस्थानों को उनकी सामान्य जरूरत का केवल 20 प्रतिशत एलपीजी ही दिया जाएगा।

  • गैस सिलेंडर दोबारा भरवाने के बीच का न्यूनतम समय भी बढ़ा दिया गया है।

इसका मकसद यह है कि लोग घबराहट में ज्यादा सिलेंडर जमा न कर लें और सभी तक गैस की पहुंच बनी रहे।

केरोसिन की वापसी क्यों जरूरी हुई

पिछले दस वर्षों में भारत ने प्रदूषण और मिलावट की वजह से केरोसिन के इस्तेमाल को लगभग समाप्त कर दिया था। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसे फिर से अस्थायी विकल्प के रूप में सामने लाया गया है।

सरकार का मानना है कि जब तक गैस आपूर्ति सामान्य स्तर पर स्थिर नहीं हो जाती तब तक ऐसे विकल्प मददगार साबित हो सकते हैं।

खाड़ी देशों पर निर्भरता बड़ी चुनौती

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अनुमान है कि करीब 85 से 90 प्रतिशत एलपीजी खाड़ी क्षेत्र से आती है। इनमें सऊदी अरब प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

इन देशों से आने वाले तेल और गैस के जहाज आम तौर पर हॉर्मोज जलडमरूमध्य के रास्ते गुजरते हैं। यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

युद्ध के कारण बाधित हुआ समुद्री मार्ग

अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इसके जवाब में ईरान की कार्रवाई से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका असर उन देशों पर पड़ रहा है जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है इसलिए यहां एलपीजी सप्लाई पर दबाव महसूस किया जा रहा है।

व्यवसायिक उपयोग पर भी नियंत्रण

एलपीजी की बचत के लिए कुछ व्यावसायिक क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधनों को अपनाने की अनुमति दी गई है। उदाहरण के तौर पर कुछ होटल और रेस्टोरेंट अब बायोमास या कचरे से बने ईंधन का उपयोग कर सकते हैं।

इसके अलावा राज्यों को घरेलू जरूरतों के लिए अतिरिक्त 48 हजार किलोलिटर केरोसिन भी उपलब्ध कराया गया है।

दूर देशों से गैस मंगाने की तैयारी

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के सप्लायरों से एलपीजी की नई खेप मंगाने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि इन क्षेत्रों से गैस लाने में दूरी के कारण ज्यादा समय लगता है।

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फिलहाल अधिकारियों के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य है। दबाव मुख्य रूप से एलपीजी सप्लाई पर है। इसलिए केरोसिन और अन्य विकल्पों को केवल अस्थायी समाधान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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