दुश्मन पर आसमान से होगी पैनी नजर, भारतीय फौज को मिलने जा रहे हैं ये हाईटेक ड्रोन

21वीं सदी के युद्ध अब पहले जैसे नहीं रहे। पारंपरिक हथियारों के मुकाबले अब आधुनिक तकनीक (advanced military drones) से लैस सिस्टम्स युद्ध के नियम बदल रहे हैं।

Latest drone in Indian Army: इंडियन आर्मी अब भविष्य की तैयारियों को लेकर एक नए दौर में कदम रखने जा रही है। आने वाले वर्षों में सेना में ऐसे एडवांस ड्रोन शामिल किए जाएंगे जो न केवल दुश्मन की हरकतों पर 24 घंटे नजर रखेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर तेज़ और सटीक जवाब भी दे पाएंगे। इस कदम को देश के दीर्घकालिक रक्षा आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा बताया जा रहा है।

गेमचेंजर साबित हो सकते हैं ड्रोन (Indian Army drones)

हाल ही में भारत की तीनों सेनाओं ने मिलकर अगले 15 सालों के लिए एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें आधुनिक तकनीकों (Latest drone in Indian Army) के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी गई है। इसमें खास फोकस है ड्रोन टेक्नोलॉजी पर जो सरहद की सुरक्षा से लेकर रणनीतिक मिशनों तक में गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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ड्रोन की खरीद को लेकर एक समर्पित योजना तैयार की गई है, जिसके तहत युद्धक्षेत्र में काम आने वाले और निगरानी के लिए अलग-अलग किस्म के ड्रोन शामिल किए जाएंगे। सेना की ये रणनीति भारत को आत्मनिर्भर बनाने के मिशन “मेक इन इंडिया” से भी जुड़ी हुई है।

क्या है इस योजना का मकसद

टेक्नोलॉजी पर्सपेक्टिव एंड कैपबिलिटी रोडमैप के नाम से तैयार इस प्रोजेक्ट का मेन मकसद है सेना की भविष्य की तकनीकी ज़रूरतों को समय रहते समझना और घरेलू रक्षा उद्योग को इसके लिए तैयार करना। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जब ज़रूरत हो, तो देश में ही बने हथियारों से लैस आधुनिक ड्रोन मौजूद हों।

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वायुसेना के लिए हाइब्रिड ड्रोन

भारतीय वायुसेना विशेष तौर पर हाइब्रिड आरपीए (रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट) को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है। ये हाइब्रिड ड्रोन फिक्स्ड-विंग और रोटरी-विंग दोनों तकनीकों को मिलाकर बनाए जाते हैं। इनकी उड़ान क्षमता लगभग 20,000 फीट तक की है, और वायुसेना को शुरुआती चरण में ऐसे 10 से 20 ड्रोन की आवश्यकता है।

एमएएलई ड्रोन की खासियत (Latest drone Features in indian army)

एमएएलई (Medium Altitude Long Endurance) ड्रोन की बात करें तो ये 30,000 से 40,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं और एक बार में 24 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार ऑपरेशन में रह सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, थल, जल और वायु—तीनों सेनाएं मिलकर 120 से अधिक ऐसे ड्रोन खरीदने की योजना बना रही हैं। इनसे सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी आसान होगी और दुश्मन की किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका

21वीं सदी के युद्ध अब पहले जैसे नहीं रहे। पारंपरिक हथियारों के मुकाबले अब आधुनिक तकनीक (advanced military drones) से लैस सिस्टम्स युद्ध के नियम बदल रहे हैं। भारत को पाकिस्तान और चीन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में एडवांस ड्रोन सेनाओं को टार्गेटेड अटैक और इंटेलिजेंस गेदरिंग में बड़ी मदद देंगे।

ड्रोन तकनीक के चलते अब सेना दुश्मन पर पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी और कुशलता से प्रहार कर सकेगी। साथ ही, इससे जवानों की जान जोखिम में डाले बिना ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सकेगा।

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