क्या SIR बीजेपी के 2027 जीतने का ‘टर्निंग पॉइंट’ है, जानें कितना होगा फायदा

उत्तर प्रदेश में SIR (सावधानी, सुरक्षा, पहचान और रजिस्ट्रेशन) अभियान को लेकर सियासी घमासान बढ़ गया है। सपा समेत विपक्षी दल इसे चुनावी रणनीति और वोटों के ध्रुवीकरण का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम मान रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी के सभी जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे अगले सात-आठ दिनों तक एसआईआर अभियान को प्राथमिकता दें और इस अभियान को सफल बनाने में जुट जाएं। यूपी पुलिस को दस्तावेजों की जांच का कार्य सौंपा गया है, और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक को 25-25 जिलों में इस पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
बीजेपी का कहना है कि इस अभियान के माध्यम से बांग्लादेशी और रोहिंगिया घुसपैठियों के वोटर लिस्ट से नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। योगी सरकार इसे आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद मान रही है, क्योंकि यह बीजेपी के राष्ट्रवादी नैरेटिव को मजबूत करता है।
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वहीं, विपक्ष ने इसे चुनावी फायदे का जरिया बताते हुए आलोचना की है। सपा और अन्य दलों का आरोप है कि यह कदम वोटरों को डराने और विभाजित करने का तरीका हो सकता है।
क्या बीजेपी को फायदा होगा
अब सवाल यह है कि क्या ये अभियान 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा दिलाएगा। अभियान 15 दिसंबर तक जारी रहेगा और इसके बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी घुसपैठियों के मुद्दे पर चिंता जताई है, जो बीजेपी के लिए राजनीतिक समर्थन को बढ़ा सकता है। लेकिन विपक्ष की प्रतिक्रिया और जनता की नजर में इसका असर देखना बाकी है।



