‘हम अमेरिका पर कभी भरोसा नहीं करेंगे…’ कूटनीति की टेबल पर ईरान ने चली कौन सी चाल

iran america deal 2026: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई मैराथन बैठक के बाद खाड़ी देशों में भू-राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अब पहले जैसी स्थिति में कभी नहीं लौट पाएगा। स्विट्जरलैंड यात्रा से स्वदेश लौटते ही गलिबाफ ने कड़े शब्दों में कहा कि होर्मुज का प्रबंधन पूरी तरह से ईरानी प्रशासन के हाथों में रहेगा और दुनिया को यह समझ लेना चाहिए कि युद्ध से पहले की तरह अब यहां से जहाजों की आवाजाही नहीं हो सकेगी। उन्होंने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा कि ईरान ने न तो कभी वाशिंगटन पर भरोसा किया था और न ही आगे कभी करेगा।
गलतफहमी दूर करने के लिए बनेगी ‘टेलीफोनिक हॉटलाइन’
इस कड़वाहट और अविश्वास के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री मार्ग पर किसी भी सैन्य टकराव या गलतफहमी को टालने के लिए एक ‘टेलीफोनिक हॉटलाइन’ और कोऑर्डिनेशन मकैनिजम (समन्वय तंत्र) बनाने पर सहमति बनी है। गलिबाफ के अनुसार, यह हॉटलाइन उच्च सुरक्षा और ट्रैफिक फ्लो को सुचारू बनाए रखने के लिए काम करेगी। यदि अमेरिका या किसी अन्य देश को होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी जहाज या शिप के आवागमन पर कोई आपत्ति होती है, तो वे सीधे इस हॉटलाइन के जरिए संपर्क कर सकते हैं। ईरान का दावा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर ही काम करेगा, लेकिन उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर लेबनान या क्षेत्र के किसी अन्य हिस्से में तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर होर्मुज की सुरक्षा पर पड़ेगा।
लेबनान संकट से समझौते पर मंडराया खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश लेबनान सरकार के साथ मिलकर एक विशेष प्रकोष्ठ (सेल) बनाने पर भी सहमत हुए हैं। यह सेल देश में जारी सैन्य टकराव को खत्म करने और इससे जुड़े वादों के पालन की निगरानी करेगा। हालांकि, यह कूटनीतिक पहल ऐसे नाजुक समय पर हो रही है जब इजरायली सेना और ईरान समर्थित हिज्बुल्ला लड़ाकों के बीच जमीनी जंग लगातार जारी है। इस वजह से अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताजा समझौतों के कमजोर पड़ने का खतरा काफी बढ़ गया है। हालांकि, सहमति पत्र के तहत दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान रोकने का संकल्प लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संघर्ष विराम की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही आगाह किया कि यह नया प्रकोष्ठ ईरान-अमेरिका समझौते की पहली सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।
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18 घंटे की मैराथन बैठक और परमाणु डील पर नजर
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ राजनयिक के अनुसार, बर्गेनस्टॉक में दोनों देशों के राजनयिकों के बीच लगभग 18 घंटे तक गहन चर्चा चली। इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के हालिया बयानों से पैदा हुई उलझन, अंतरराष्ट्रीय नौवहन की आजादी (Freedom of Navigation) और लेबनान में क्षेत्रीय तनाव को बढ़ने से रोकने के उपायों पर विस्तार से बात की गई। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने भविष्य में एक संभावित परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के विभिन्न पहलुओं पर भी तकनीकी चर्चा की। हालांकि, बैठकों के अगले दौर के लिए अभी किसी निश्चित समय-सारणी का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद है कि इसी सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहेगी। दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज से समुद्री आवाजाही को कवर करने वाले एक व्यापक समझौते (Comprehensive Agreement) की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



