भारत को ट्रंप की धमकी का दिखा असर, रुसी तेल का हुआ बुरा हाल
india russian oil imports: रूस से भारत को तेल की आपूर्ति में गिरावट आ रही है। जानें, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारतीय रिफाइनरी इस बदलाव का कैसे सामना कर रही हैं।

india russian oil imports: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित कुछ देशों पर दबाव डाला था कि वे रूस से तेल खरीदने से बचें, मगर भारत की तरफ से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद 22 अक्टूबर को अमेरिका ने रूस की प्रमुख तेल कंपनियों रॉसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए। इसके परिणामस्वरूप, भारत को रूस से तेल की आपूर्ति में गिरावट देखी जा रही है।
वैश्विक डेटा के मुताबिक, अक्टूबर के अंत तक रूस से भारत को तेल का औसत निर्यात 11.9 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो पहले के 19.5 लाख बैरल प्रति दिन से कम था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण शिपमेंट में कमी का परिणाम हो सकती है।
तेल आयात में गिरावट की संभावना तय (India Russia oil trade)
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने सतर्कता बरतते हुए रूस से तेल आयात को अस्थायी रूप से निलंबित करना शुरू किया है। भारतीय कंपनियां और बैंक रूस से जुड़े लेन-देन से बचने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के कुल तेल आयात में रूस का हिस्सा लगभग 35% है, मगर अब इसमें कमी आने की संभावना है।
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हालांकि, नवंबर के बाद अधिकांश रिफाइनरियां रूस से तेल आयात बंद कर सकती हैं, मगर कुछ तेल वैकल्पिक रास्तों से आता रहेगा। भारत ने नए आपूर्ति स्रोतों की तलाश भी शुरू कर दी है और रूस से आयात पूरी तरह बंद नहीं होगा क्योंकि यह अभी भी आर्थिक रूप से किफायती है।
कुल मिलाकर रूस से तेल आयात पूरी तरह से बंद होने की संभावना नहीं है, क्योंकि यह भारतीय बाजार के लिए अभी भी आर्थिक रूप से किफायती है। जब तक भारत सरकार औपचारिक रूप से प्रतिबंधों को लागू नहीं करती, तब तक रूस से तेल कुछ मात्रा में मध्यस्थ चैनलों के जरिए भारत आता रहेगा।



