भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है- डॉ मिश्र

चाँदा सुल्तानपुर

भागवत माहात्म्य ज्ञान के बिना प्रेम चिरंजीव नहीं होता। जीवन जिया कैसे जाय और यहॉ से जाया कैसे जाय का सम्यक बोध भागवत श्रवण से होता है।भागवत मरण मंगलमय होना बताती है ।

उक्त उदगार रामनगर गाँव मे श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञानकथा यज्ञ में वाराणसी से पधारे डॉ मदन मोहन मिश्रा मानस कोविद जी महाराज ने व्यक्त किए। महराज श्री ने परीक्षित जन्म एंव शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। डॉ मिश्र ने आगे कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है। वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य व देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते हैं।

महराज श्री ने आगे कहा कि कामना युक्त साधना शीघ्र सिद्ध नहीं होता है । श्रीमदभागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है, आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानन्द की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेतयोनी से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमदभागवत कथा सुननी चाहिए।

भागवत श्रवण मनुष्य केे सम्पूर्ण कलेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। सम्पूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है ओर हमारे सारे कार्य सफल होते है। ठीक उसी तरह बुरे कर्मो की राह के दौरान सम्पूर्ण बुरी शक्तियॉ हमारे साथ हो जाती है। इस दौरान मनुष्य को निर्णय करना होता कि उसे किस राह पर चलना है। छल और छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। छल रूपी खटाई से दुध हमेशा फटेगा।

छलछिद्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते है। निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है। इसके पूर्व मुख्य जजमान रामदुलार मिश्र ने व्यासपीठ पूजन और माल्यार्पण किया। इस मौके पर विनोद मिश्र, प्रमोद मिश्र, विनय मिश्र , सभाजीत, राजेंद्र श्रीवास्तव,एल पी सिंह, की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संचालन विद्याधर तिवारी ने किया।

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