Durgapur Gangrape Case: दीदी का यूटर्न

Durgapur Gangrape Case: पश्चिम बंगाल से बाहर की छात्राओं को हॉस्टल के नियमों का पालन करना चाहिए। उन्हें देर रात बाहर नहीं निकलना चाहिए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह बयान एकाएक विवाद का कारण बन गया है। विपक्ष द्वारा तीखी आलोचना करने पर उन्हें यूटर्न लेना पड़ा है। उन्होंने मीडिया पर बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप मढ़कर अपना बचाव किया है।
दरअसल मामला मेडिकल की छात्रा से गैंगरेप होने का है। ओडिशा की छात्रा पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में निजी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई कर रही है। पढ़ाई के सिलसिले में वह हॉस्टल में रहती है। हॉस्टल से कुछ दूरी पर छात्रा को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। यह सनसनीखेज मामला प्रकाश में आने के बाद से बंगाल की सियासत गरम है।
विपक्षी दलों ने राज्य की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बीच सीएम ममता बनर्जी ने ऐसा बयान दे दिया है, जिस पर विपक्ष तमतमा गया है। पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि राज्य में पुलिस का एजेंडा सिर्फ ममता बनर्जी और उनके भ्रष्ट भतीजे को प्रोटेक्ट करना है।
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इसके अलावा झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि बंगाल में सरकार गुंडागर्दी करती है। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की खराब स्थिति जगजाहिर है। वहां महिलाओं के खिलाफ संगीन अपराध होना कोई नई बात नहीं है।
पिछले साल कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या की वारदात सामने आई थी। वारदात के विरोध में पूरे राज्य में जमकर बवाल मचा था। कुछ माह पहले कोलकाता में लॉ कॉलेज की छात्रा से गैंगरेप की घटना घटी थी। अब Durgapur Gangrape Case ने ममता सरकार की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। जबकि विपक्ष को सत्ता पक्ष को घेरने के लिए नया हथियार मिल गया है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुखिया ममता बनर्जी लंबे समय से सत्ता की कमान संभाल रही हैं। इसके बावजूद राज्य में महिलाओं को सुरक्षित माहौल न मिलना चिंताजनक बात है। बंगाल में घुसपैठ की समस्या भी गंभीर है। वहां बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों के अलावा बांग्लादेशी नागरिक अवैध तरीके से रह रहे हैं। अपराधों में वृद्धि का एक कारण अवैध घुसपैठियों को माना जाता है, मगर जब घुसपैठियों को निकालने का मुद्दा उठता है तो टीएमसी विरोध पर उतर आती है। बंगाल में पिछले कुछ साल में भाजपा ने अपनी जमीन मजबूत की है।
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वर्तमान में वह टीएमसी के बाद नंबर-2 की पार्टी बन चुकी है। टीएमसी और भाजपा के मध्य छत्तीस का आंकड़ा है। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं में अक्सर खूनी संघर्ष तक होता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी टीएमसी को भाजपा से कड़ी चुनौती मिली थी। अगले विस चुनाव में भी मुख्य मुकाबला इन दोनों दलों के बीच होने की प्रबल संभावना है। महिला होने के नाते ममता बनर्जी को जघन्य अपराध की शिकार किसी भी महिला का दर्द ज्यादा अच्छे तरीके से समझना चाहिए।
संवेदनशील मामले में उन्हें ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जिससे पीड़ित पक्ष का दर्द और बढ़ जाए। पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था में व्यापक स्तर पर सुधार लाने की आवश्यकता है। इसके मद्देनजर उचित कदम उठाने होंगे। जब तक हालात नहीं सुधरते तब तक विपक्ष को भी शांति एवं खामोशी से नहीं बैठना चाहिए।



