चौधराहट की जंग; भारत-चीन नजदीकी, अमेरिका के लिए सबसे बड़ा झटका

पाकिस्तान पर भरोसा क्यों नहीं कर सकता चीन

दुनिया का ‘बॉस’ क्या बदल जाएगा? अमेरिका की बादशाहत क्या खतरे में पड़ चुकी है? क्या चीन दुनिया का नया चौधरी बनने की ओर अग्रसर है? क्या डॉलर की चमक-धमक फीकी पड़ जाएगी? क्या बीजिंग के चक्रव्यूह में वाशिंगटन फंस गया है? क्या डोनाल्ड ट्रंप की गलत नीतियां यूएस को बर्बादी की तरफ धकेल रही हैं?

दुनिया भर में आजकल चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की चर्चाएं चल रही हैं। शिखर सम्मेलन के दौरान चीन में नामचीन हस्तियों के जुटने से अमेरिका की बेचैनी बढ़ी हुई है। शी जिनपिंग के आमंत्रण पर मुख्य रूप से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन जैसे बड़े लीडरों का पहुंचना यह दर्शाता है कि अमेरिका की चौधराहट के दिन अब लदने लगे हैं।

चीन ने एक तीर से कई निशाने साधे

व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन को जिनपिंग का करीबी माना जाता है, मगर पीएम मोदी के साथ मतभेद दूर कर उन्हें शिखर सम्मेलन में बुलाकर जिनपिंग ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। अमेरिका पिछले ढाई दशक से भारत को अपने साथ लाने और चीन से दूर रखने की कोशिश कर रहा था। इस कोशिश में वह काफी हद तक कामयाब हो चुका था, मगर डोनाल्ड ट्रंप के कुछ गलत फैसलों ने दोनों देशों के संबंधों को खराब कर दिया।

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ट्रंप की पाकिस्तान पर मेहरबानी ने भारत को कर दिया नाराज

कहा जाता है कि अपने परिवार के मोह में ट्रंप ने भारत-अमेरिका के रिश्तों को कुर्बान करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। दरअसल ट्रंप की पाकिस्तान पर मेहरबानी ने भी नई दिल्ली को नाराज कर दिया है।

असीम मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप ने जिस प्रकार तवज्जो दी

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप ने जिस प्रकार तवज्जो दी, वह भारत को काफी अखरा है। चूंकि पहलगाम आतंकी हमले में असीम मुनीर को मुख्य षडयंत्रकर्ता के तौर पर देखा जाता रहा है। मुनीर निरंतर भारत विरोधी बयान देते रहे हैं। वैसे चीन का ताकतवर होना भी अच्छे संकेत नहीं हैं।

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चीन की विस्तारवादी नीति जगजाहिर है। इस नीति के तहत वह दूसरे देशों की जमीन पर लालची नजरें लगाए रहता है। भारत संग भी उसका सीमा विवाद लंबे समय से चल रहा है। रूस के कुछ भूभाग पर भी वह अपना दावा ठोक चुका है। भारत का चीन के प्रति झुकाव अमेरिका के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

भारत के सपोर्ट के बगैर वह चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने की स्थिति में नहीं है। रूस, जापान, उत्तर कोरिया व भारत जैसे देश यदि चीन की छतरी के नीचे आ जाते हैं तो अमेरिका चाहकर भी कुछ नहीं कर पाएगा।

पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता चीन

पाकिस्तान पर चीन भरोसा नहीं कर सकता। क्योंकि इस्लामाबाद की नीतियां थाली के बैंगन जैसी हैं। जिसका पलड़ा भारी नजर आता है, वह उधर लुढ़क जाता है। पाकिस्तान को वह सिर्फ भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा है। इस बीच शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती भरे लहजे में दो टूक संदेश दिया है कि दादागीरी से दुनिया नहीं चलेगी।

शिखर सम्मेलन और भव्य सैन्य परेड समारोह के बहाने बीजिंग ने अमेरिका को बता दिया है कि उसे कम आंकने की भूल न की जाए। बदले घटनाक्रम से भारतीयों को ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि चीन की नीतियों एवं नीयत पर आंख मूंदकर भरोसा करना अच्छा नहीं होगा। भारत को भविष्य में प्रत्येक कदम फूंक-फूंक कर उठाना चाहिए।

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