हसीना के बहाने भारत पर निशाना, छात्र नेता की मौत को बनाया जा रहा है हथियार
bangladesh news today: बांग्लादेश में एक बार फिर हालात खराब होना भारत के हित में नहीं हैं। पड़ोसी मुल्क में भारत विरोधी माहौल बनाने की साजिश गंभीर चिंता का विषय है। षडयंत्र के पीछे छिपी ताकतों की पहचान करने की जरूरत है। बांग्लादेश में अगले कुछ माह में आम चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले पुन: हिंसा की ज्वाला भड़कना जांच का पहलू है।
छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में बवाल शुरू हो गया है। सड़कों पर उतरी भीड़ को अराजकता करने से रोकने में पुलिस तंत्र नाकाम है। उग्र भीड़ ने न सिर्फ भारतीय मिशन की इमारत पर पथराव किया बल्कि मीडिया संस्थानों में भी तोड़फोड़ की है। इसके अलावा हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर देने की खबर भी सामने आई है।
पेड़ से बांधकर युवक को आग के हवाले कर दिया
हत्यारों ने युवक को मौत के घाट उतारने के बाद शव को पेड़ से बांधकर आग के हवाले कर दिया। बांग्लादेश में यह हिंसक प्रवृत्ति इंसानियत के मुंह पर करारा तमाचा है। मौजूदा स्थिति से निपटने में मोहम्मद युनूस बिल्कुल असफल नजर आते हैं। bangladeshi सरकार के मुख्य सलाहकार यूनुस का अब तक का कार्यकाल कतई संतोषजनक नहीं रहा है। पिछले सवा साल के भीतर देशभर में पांच हजार नागरिकों की हत्या हो चुकी हैं। हत्याओं के यह आंकड़े पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं। वास्तविक आंकड़े कहीं ज्यादा होने की संभावना है।
अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर मोहम्मद युनूस बांग्लादेश को शांति, खुशहाली एवं प्रगति के पथ पर ले जाने में फेल रहे हैं। इस बीच छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद जिस प्रकार से भारत पर बेतुके आरोप लगाए गए हैं, वह किसी गहरी साजिश का हिस्सा प्रतीत होते हैं। आरोप है कि छात्र नेता की हत्या के बाद दो हमलावर भारत में प्रवेश कर गए थे।
जानें कौन थे उस्मान हादी जिनकी हत्या से जला उठा बांग्लादेश
हालांकि इन आरोपों के संबंध में कोई पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। छात्र नेता हत्याकांड के बहाने भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने का खेल खेला जा रहा है। बांग्लादेश फिलवक्त कट्टरपंथी संगठनों के आगे घुटने टेक चुका है। इन संगठनों को उस भारत से नफरत है, जिसने बांग्लादेश को अस्तित्व में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
भारत विरोधी साजिश की प्रयोगशाला बन चुका है बांग्लादेश
दरअसल बांग्लादेश आज भारत विरोधी साजिश की प्रयोगशाला बन चुका है। जहां अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ढाका के साथ संबंध बढ़ाए हैं। आईएसआई के इशारे पर पूरे देश को कट्टरपंथ की आग में झोंका जा रहा है। इसके चलते बांग्लादेश के कुछ युवा नेता सार्वजनिक तौर पर भारत के खिलाफ जहरीले बयान दे रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के रिश्ते नाजुक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। पूर्व पीएम शेख हसीना लंबे समय से भारत में शरण लिए हैं।
बांग्लादेश में एक बड़ा तबका शेख हसीना को आज खलनायिका के रूप में देख रहा है। कट्टरपंथी संगठनों ने हसीना के बहाने भारत को घेरने की भरपूर कोशिश की है। जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश में अस्थिरता बढ़ना भारत के हित में नहीं है। खासकर चीन और पाकिस्तान वहां अपने स्वार्थों की पूर्ति करने में मशगूल हैं।
संभवत: मोहम्मद युनूस भी नहीं चाहते कि देश में हालात बेहतर रहें। चूंकि माहौल अच्छा होने पर भविष्य में उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी। मसलन बांग्लादेश में लोकतंत्र की स्थापना बेहद आवश्यक है। जब तक ऐसा नहीं होता, वहां शांति की उम्मीद करना बेमानी है।



