दिल्ली में अम्बेडकरी महिला मंच ने मनाया लॉर्ड मैकॉले का जन्मदिन

आधुनिक शिक्षा, समानता और भारतीय न्याय व्यवस्था में मैकॉले के योगदान पर बुद्धिजीवियों ने रखे विचार

स्टार एक्सप्रेस संवाददाता

नई दिल्ली। अम्बेडकरी महिला मंच की ओर बीते 25 अक्टूबर को दिल्ली में मीरा एवं चंद्रभान प्रसाद के आवास पर आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार से जुड़े ब्रिटिश विद्वान लॉर्ड थॉमस बैबिंगटन मैकॉले का जन्मदिन मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित विचार-विमर्श में शिक्षा, जातिगत समानता, रोजगार और भारतीय न्याय व्यवस्था में मैकॉले की भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवियों और मंच की सदस्यों ने अपने विचार रखे।

दलित विचारक चंद्रभान प्रसाद ने मैकॉले के विचारों और कानूनी योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि कानून के समक्ष समानता की अवधारणा सामाजिक न्याय की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय दंड संहिता (IPC) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। साथ ही, वर्ष 2004 में उनके द्वारा स्थापित ‘गॉडेस ऑफ इंग्लिश’ की अवधारणा पर चर्चा की।

कार्यक्रम की मेजबान मीरा जी ने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से लॉर्ड मैकॉले का जन्मदिन मनाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले इस आयोजन की जिम्मेदारी मुख्य रूप से चंद्रभान प्रसाद निभाते थे, लेकिन इस बार अम्बेडकरी महिला मंच ने इसकी पहल की। दलित महिलाओं की वैचारिक चर्चाओं में भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता को महसूस करते हुए उन्होंने अपने घर से इसकी शुरुआत की।

मंच की महासचिव शालिनी ने मैकॉले की शिक्षा व्यवस्था से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तक के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि मैकॉले से जुड़ी शिक्षा व्यवस्था और औपनिवेशिक दौर में विकसित कानूनी संस्थाओं के प्रभाव का ऐतिहासिक मूल्यांकन जरूरी है। कैथरीन मेयो की पुस्तक ‘मदर इंडिया’ का संदर्भ देते हुए उन्होंने शिक्षा के अधिकार, रोजगार और सामाजिक समानता को लेकर ऐतिहासिक आंदोलनों तथा वर्तमान बहसों के बीच संबंधों पर सवाल उठाए।

डॉ. रतन लाल ने मैकॉले को आधुनिक शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि अंग्रेजी शिक्षा का लाभ दलितों की तुलना में ब्राह्मण समाज ने अधिक उठाया। उन्होंने आधुनिक विज्ञान, चिकित्सा और रोजगार के अवसरों में अंग्रेजी शिक्षा की भूमिका का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि मैकॉले के योगदान पर चर्चा करते समय भारतीय संविधान, गणराज्य और समानता से जुड़े मूल्यों के संदर्भ को भी ध्यान में रखना चाहिए।

मंच की अध्यक्ष संतोष इंदौरा ने मैकॉले के जीवन और शिक्षा संबंधी नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा के विस्तार ने महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसे समाज सुधारकों के शैक्षिक प्रयासों के लिए अवसर तैयार किए। वहीं, मंच की कार्यकारिणी सदस्य सरला ने ज्योतिबा फुले की कविता ‘विद्या बिना मति गयी’ की व्याख्या करते हुए शिक्षा को तार्किक सोच और सामाजिक बदलाव का आधार बताया।

उषा किरण ने कहा कि दलित समाज को अंग्रेजी शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इससे ज्ञान, विचार-विमर्श और रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों के जरिए शिक्षा और समानता के अधिकार पर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम में राजरानी चंदन, एडवोकेट अनिता सरोज, सुधा परमार्थ, स्वाति, अनिता, डॉ. नीलम, आद्या लाल, कियोना, मिशिका, ईशान लाल, चंदन और राहुल नागपाल सहित अन्य लोगों ने भी चर्चा में भाग लिया।

वक्ताओं ने शिक्षा को सामाजिक जागरूकता और समान अवसरों से जोड़ते हुए अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के आयोजन और सभी को चर्चा के लिए आमंत्रित करने के लिए मंच की सचिव मीरा जी का विशेष आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम के वीडियो अम्बेडकरनामा और न्यूज हिंट लाइव के यूट्यूब चैनलों पर उपलब्ध हैं।

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