अखिलेश यादव का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा, जरा सी चूक और नेताओं पर चला दिया पार्टी का ‘बुलडोजर’

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी के भीतर इन दिनों कड़ा अनुशासन देखने को मिल रहा है। लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी कामयाबी के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। पार्टी नेताओं को सार्वजनिक मंचों से लेकर सोशल मीडिया पर संयम बरतने की सख्त हिदायत दी गई है। यही वजह है कि महज एक महीने के भीतर चार जिलों और एक पूरे राज्य की संगठनात्मक इकाइयों पर सीधे कार्रवाई की गाज गिर चुकी है।

ताजा मामला अखिलेश के अपने सियासी गढ़ कन्नौज से सामने आया। यहां आयोजित पीडीए सम्मेलन के दौरान सीटें खाली रहने पर पार्टी नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया। अपेक्षित भीड़ न जुटने और खाली कुर्सियों का वीडियो वायरल होने के बाद, प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर जिलाध्यक्ष समेत पूरी जिला कार्यकारिणी को तुरंत भंग कर दिया। इस वाकये को लेकर भाजपा नेता असीम अरुण और पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने सपा की संगठनात्मक पकड़ पर सीधे तंज कसे थे, जिसके तुरंत बाद यह बड़ा फैसला लिया गया।

इससे पहले 3 अक्टूबर को गोरखपुर में भी अनुशासनहीनता पर ऐसा ही चाबुक चला था। शास्त्री चौक स्थित जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में पार्टी की आधिकारिक प्रेस वार्ता चल रही थी, जिसमें जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम और महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी मौजूद थे। इसी दौरान बांसगांव के पूर्व चेयरमैन अंशुमान सिंह की एंट्री हुई और अगली कतार की कुर्सी को लेकर उनके समर्थकों की पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से तीखी झड़प हो गई। बात हाथापाई और धमकियों तक जा पहुंची। पत्रकारों के कैमरों में कैद हुए इस बवाल की खबर जैसे ही अखिलेश यादव तक पहुंची, उन्होंने गोरखपुर की जिला, महानगर और सभी फ्रंटल इकाइयों को फौरन भंग करने का फरमान सुना दिया।

गुटबाजी की ऐसी ही एक शर्मनाक तस्वीर 19 सितंबर को सीधे लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में देखने को मिली थी। एटा और कासगंज के संभावित विधानसभा दावेदारों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें करीब 300 कार्यकर्ता मौजूद थे। अखिलेश यादव खुद एक-एक कर फीडबैक ले रहे थे। इसी बीच सपा नेता मंजीत यादव और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव के बीच तीखी तकरार शुरू हो गई। अपने सामने नेताओं को लड़ता देख सपा प्रमुख बेहद नाराज हुए और ‘जिसे जहां जाना है जाए’ कहते हुए बैठक छोड़कर निकल गए। उसी शाम एटा और कासगंज दोनों जिलों की कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठन खत्म कर दिए गए।

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अनुशासन का यह कड़ा संदेश सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। 3 अक्टूबर को उत्तराखंड में भी समाजवादी पार्टी के पूरे ढांचे को पुनर्गठित करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया। नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने अखिलेश यादव के निर्देश पर राज्य कार्यकारिणी सहित सभी जिला, महानगर, नगर इकाइयों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। पार्टी अब पूरे राज्य में जमीनी स्तर पर नए सिरे से ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को जोड़कर संगठन तैयार कर रही है।

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