परीक्षित जन्म की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु

भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से गर्भ में ही परीक्षित को मिला जीवनदान

जसवंतनगर,इटावा। नगर में स्थित एक मैरिज होम में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को कथा व्यास स्वामी श्याम नारायण महाराज ने परीक्षित जन्म की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा सुनने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

गर्भ में ही भगवान ने की परीक्षित की रक्षा

भागवत पुराण के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद जब अश्वत्थामा ने पांडव वंश को समाप्त करने के उद्देश्य से उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने दिव्य प्रभाव से गर्भस्थ शिशु की रक्षा की। यही शिशु आगे चलकर राजा परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ। भगवान की कृपा से जीवनदान मिलने के कारण परीक्षित का जीवन ईश्वरीय संरक्षण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी उनकी कृपा पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।

सात दिन तक सुनी थी श्रीमद्भागवत कथा

कथा व्यास ने राजा परीक्षित के जीवन के अंतिम प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि शाप मिलने के बाद राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह त्यागकर गंगा तट पर शुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया था। सात दिनों तक चले इस ज्ञान यज्ञ में शुकदेव जी ने उन्हें भगवान की महिमा, भक्ति और जीवन के आध्यात्मिक रहस्यों का ज्ञान दिया। इस प्रसंग से प्रेरणा मिलती है कि मनुष्य को जीवन की नश्वरता को समझते हुए ईश्वर के स्मरण और सत्कर्मों में अपना समय लगाना चाहिए।

स्वामी श्याम नारायण महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक प्रसंगों का वर्णन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ज्ञान है। कथा के दौरान भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भावपूर्वक कथा का श्रवण करते रहे। कथा में परीक्षित की भूमिका श्रीमती सुनीता गुप्ता एवं मनोज गुप्ता ने निभाई। आयोजक परिवार की ओर से श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। अंत में भगवान की आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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