ऐतिहासिक लखेरा कुआं अनदेखी का शिकार: मिटने लगी पहचान
एक दशक पहले तक राहगीरों की बुझाता रहा प्यास

(विजयेंद्र तिमोरी)
जसवंतनगर,इटावा। नगर को इटावा और यमुना पारपट्टी क्षेत्र के आगरा जिले से जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक लखेरा कुआं जिम्मेदारों की अनदेखी का शिकार है। लंबे समय से साफ-सफाई और रखरखाव नहीं होने से यह प्राचीन धरोहर गंदगी, झाड़ियों और अतिक्रमण के बीच अपना अस्तित्व खोती जा रही है। करीब एक दशक पहले तक यहां राहगीर रुककर पानी पीते थे, लेकिन अब यह स्थान बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है।
बताया जाता है कि पक्के लखेरा कुएं का निर्माण लाखा बंजारे ने कराया था। कुएं के अंदर तक जाने के लिए पक्की सीढ़ियां बनी हैं, जो इसकी प्राचीन निर्माण शैली को दर्शाती हैं। कभी यहां राहगीरों की सुविधा के लिए पानी उपलब्ध रहता था। कुएं के पास विशाल बरगद का पेड़ भी लोगों को छाया देता था। समय के साथ देखरेख के अभाव में कुआं और उसके आसपास का क्षेत्र उपेक्षित होता चला गया।
कुएं के नाम पर ही क्षेत्र की पहचान
लखेरा कुआं केवल पुराना जलस्रोत ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान से भी जुड़ा है। आसपास का इलाका आज भी लखेरे कुआं के नाम से जाना जाता है। यहां स्थित पुलिस चौकी का नाम भी लखेरे कुआं पुलिस चौकी है। इसके बावजूद जिस ऐतिहासिक धरोहर के नाम से क्षेत्र की पहचान बनी हुई है, उसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की ओर जिम्मेदार विभागों का ध्यान नहीं है।
झाड़ियों में पनप रहे विषैले जीव, मच्छरों का भी प्रकोप
कुएं के आसपास सफाई नहीं होने से झाड़ियां और गंदगी का ढेर लगा हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार झाड़ियों में सांप और बिच्छू जैसे विषैले जीव निकलते रहते हैं। वहीं गंदगी और जमा पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। इससे आसपास रहने वाले लोगों के साथ राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी मुकेश, आलोक, राधेश्याम, मनीष, शिवम, बलवीर, राहुल, तरुण और प्रशांत आदि ने बताया कि यदि समय रहते कुएं की सफाई कराकर आसपास से अतिक्रमण हटाया जाए और इसके ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित किया जाए तो इसे दोबारा आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। लोगों ने शासन-प्रशासन से लखेरा कुएं की साफ-सफाई, जीर्णोद्धार और संरक्षण की ठोस व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्र की इस ऐतिहासिक धरोहर को पूरी तरह जमींदोज होने से बचाया जा सके।



