मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती बीजेपी, पार्टी से बगावत के बाद शहजाद का बड़ा हमला

Barkha Dutt Podcast Inside Out: भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के तुरंत बाद कद्दावर नेता शहजाद पूनावाला अपने बयानों को लेकर अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के चर्चित पॉडकास्ट ‘इनसाइड आउट’ में बातचीत के दौरान उन्होंने बीजेपी छोड़ने के फैसले से लेकर अपने आगे के सफर पर खुलकर बेबाक राय रखी।
बातचीत के दौरान उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और देश भर में हुए पेपर लीक आंदोलन को हैंडल करने के भाजपा के तौर-तरीकों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधी टिप्पणी की।
‘भाजपा मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती, लेकिन फिर भी दूसरी पार्टियों से बेहतर’
पॉडकास्ट में शहजाद पूनावाला ने साफ तौर पर कहा कि अब वे भाजपा से पूरी तरह अलग हो चुके हैं, लिहाजा वे जो चाहें खुलकर कह सकते हैं और भाजपा उनका बाल भी बांका नहीं कर सकती। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसके बावजूद भाजपा अन्य राजनीतिक दलों के मुकाबले आज भी कहीं बेहतर है। नीट (NEET) पेपर लीक आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से प्रतिक्रिया में हुई देरी पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि भाजपा एक विशालकाय संगठन और बड़ी टीम है, यही वजह है कि कभी-कभी किसी अहम निर्णय पर पहुंचने में वक्त लग सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का दिया हवाला, विपक्षी दलों पर दागे सवाल
शहजाद पूनावाला ने आगे कहा कि भाजपा कोई बेशरम पार्टी नहीं है, उसमें आज भी शर्म-ओ-हया बाकी है। उन्होंने तर्क दिया कि नीट विवाद में जो भी हुआ, उसके बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया गया। इसी कड़ी में विपक्षी सरकारों को घेरते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक में ऐसे मामलों पर शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया? पंजाब में छह बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं या झारखंड में गड़बड़ियां हुईं, तो वहां के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे क्यों नहीं लिए गए?
पीएम मोदी को बताया ‘बुरा तानाशाह’ और की इस्तीफे की मांग
पॉडकास्ट के दौरान शहजाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखे तंज कसे। उन्होंने पीएम मोदी को एक बेहद ‘बुरा तानाशाह’ करार देते हुए कहा कि इस मामले में वे उन्हें 100 में से शून्य अंक देते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने मोदी जी से इस्तीफा देने और खुद को फेलियर मानने तक को कहा, क्योंकि वे इंदिरा गांधी की तरह न तो इमरजेंसी लगा पाए, न अन्ना हजारे जैसे आंदोलनकारियों पर राजद्रोह के मुकदमे दर्ज कराए, न राजीव गांधी की तरह मीडिया की आवाज को दबाया और न ही सोनिया गांधी के दौर की तरह किताबों पर पाबंदियां लगाईं।
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राहुल गांधी के बदलाव और कमियों पर शहजाद का विश्लेषण
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में पूनावाला ने माना कि 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने अपने भीतर सुधार और बदलाव जरूर किए हैं, लेकिन वे बदलाव उतने पर्याप्त नहीं हैं जितने एक बड़े नेता के लिए होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें लगता है कि उन्हें हर बात का ज्ञान है। पूनावाला ने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी और उनमें एक समानता यह है कि दोनों को पता है कि सीजेपी (CJP) मूवमेंट को अरविंद केजरीवाल ने फंड किया था, लेकिन राहुल गांधी की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी राजनीति में निरंतरता (कंसिस्टेंसी) का अभाव होना है।


