जेब में थे सिर्फ 21 रुपये, श्मशान में गुजारी रातें; आज हैं टीम इंडिया के सुपरस्टार

Raghu Raghavendra story: क्रिकेट की दुनिया में जीत का श्रेय आमतौर पर मैदान पर उतरने वाले खिलाड़ियों को मिलता है। लेकिन एक मजबूत टीम तैयार करने में पर्दे के पीछे काम करने वाले विशेषज्ञों की भूमिका भी कम नहीं होती। रघावेंद्र द्विवेदी उर्फ रघु ऐसी ही शख्सियत हैं। वह भारतीय टीम के लिए थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के तौर पर लंबे समय से काम कर रहे हैं।
रघु की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका अपना क्रिकेटर बनने का सपना अधूरा रह गया था। आर्थिक परेशानियों और एक हादसे ने उन्हें मैदान पर खिलाड़ी बनने से रोक दिया। इसके बावजूद उन्होंने क्रिकेट से रिश्ता नहीं तोड़ा। आज वही जुनून उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े नामों के अभ्यास सत्र तक लेकर आया है।
गुवाहाटी में एक पल ने दिलाई पहचान
25 जनवरी 2025 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच गुवाहाटी में मुकाबला हुआ। सूर्यकुमार यादव ने उस मैच में शानदार 82 रन बनाए और टीम इंडिया की जीत में बड़ी भूमिका निभाई।
मैच के बाद जब सूर्यकुमार डगआउट की तरफ लौटे तो उन्होंने वहां मौजूद रघु के पैर छुए। यह दृश्य कैमरे में कैद हो गया। इसके बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट प्रशंसकों के बीच रघु को लेकर उत्सुकता बढ़ी।
कई लोगों ने उन्हें पहली बार तब पहचाना। हालांकि भारतीय टीम के साथ उनका जुड़ाव नया नहीं था। वह करीब 16 वर्षों से टीम इंडिया के सेटअप का हिस्सा रहे हैं।
जेब में सिर्फ 21 रुपये थे और मंजिल थी क्रिकेट
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के कुमटा में एक शिक्षक परिवार में जन्मे रघु भी दूसरे युवाओं की तरह क्रिकेटर बनना चाहते थे। परिवार की इच्छा थी कि वह पढ़ाई और सुरक्षित करियर पर ध्यान दें। मगर क्रिकेट के प्रति उनका जुनून लगातार बढ़ता गया।
आखिरकार वह एक बैग और कुछ कपड़े लेकर कुमटा से हुबली निकल पड़े। उस वक्त उनकी जेब में सिर्फ 21 रुपये थे। उनके पास न रहने की पक्की जगह थी और न ही रोजमर्रा का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त पैसे।
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कुछ समय तक उन्होंने हुबली बस स्टैंड पर रातें गुजारीं। करीब 10 दिन बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसके बाद उन्हें श्मशान में रहने की जगह मिली। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। इसी दौर में उनके दाहिने हाथ में चोट लगी और वह टूट गया।
इतनी परेशानियों के बावजूद रघु ने वापस घर जाने का फैसला नहीं किया।



