जेपीएनआईसी पर घमासान! अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा, एलडीए की रिपोर्ट पर उठाए बड़े सवाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) को निजी हाथों में लीज पर सौंपने का मामला अब बड़े सियासी संग्राम में तब्दील हो चुका है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक वीडियो साझा करते हुए योगी सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया है। अखिलेश यादव ने एलडीए द्वारा तैयार की गई उस रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं, जिसके आधार पर सरकार जेपीएनआईसी के निजीकरण और लीज आवंटन के फैसले का बचाव कर रही है।

‘अगर भाजपा चलाएगी तो घाटा तय’: अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए तंज कसा कि एलडीए ने यह सच ही स्वीकार कर लिया है कि यदि जेपीएनआईसी का संचालन भाजपा सरकार करेगी तो हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होना तय है, क्योंकि सारा मुनाफा कमीशनखोर और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ जाएगा। उन्होंने एलडीए के अधिकारियों की समझ पर सवाल दागते हुए पूछा कि क्या कोई निजी कारोबारी घाटे का सौदा करेगा, जहां वह अधिकारियों को भारी कमीशन भी दे और खुद घाटा भी उठाए।

एलडीए को बताया ‘लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी’, कमीशन पर पूछे तीखे सवाल

अखिलेश यादव ने एलडीए के नाम पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब लखनऊ विकास प्राधिकरण का नाम बदलकर ‘लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी’ कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता अब सीधे पूछ रही है कि ऐसी रिपोर्ट तैयार करने के एवज में अधिकारियों को कितने प्रतिशत का कमीशन मिला है। सपा अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री और सरकारी महकमे जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने को लेकर इतनी लंबी-चौड़ी सफाई क्यों पेश कर रहे हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे सौदे में कुछ न कुछ गड़बड़ी जरूर है।

800 करोड़ का ड्रीम प्रोजेक्ट और 30 साल की लीज का पूरा गणित

उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान गोमती नगर इलाके में लगभग 800 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत से इस बहुउद्देशीय अंतरराष्ट्रीय केंद्र का निर्माण शुरू कराया गया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह परियोजना अधूरी रह गई और लंबे समय तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका।

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अब योगी सरकार ने इसके शेष निर्माण कार्यों को पूरा करने और रखरखाव के उद्देश्य से इसे 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को सौंपने का निर्णय लिया है। सरकार और एलडीए का तर्क है कि इस पीपीपी मॉडल से न केवल केंद्र का विश्वस्तरीय संचालन सुनिश्चित होगा, बल्कि प्राधिकरण को नियमित राजस्व भी मिलेगा। वहीं सपा इसे प्रदेश की बेशकीमती सार्वजनिक संपत्ति को कौड़ियों के भाव निजी हाथों में बेचने की साजिश करार दे रही है।

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