गोवर्धन पूजा-कंस वध प्रसंग ने किया भावविभोर

जसवंतनगर,इटावा। नगला नरिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास धर्मेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पूजा एवं कंस वध लीला का अत्यंत भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन किया। कथा का श्रवण करने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने पूरे श्रद्धाभाव के साथ कथा का रसपान किया।
कथा व्यास ने कहा कि जब इंद्र के अहंकार के कारण ब्रज में मूसलाधार वर्षा होने लगी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। यह प्रसंग हमें प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिक एकता तथा अहंकार का त्याग करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को ईश्वर पर अटूट विश्वास रखते हुए सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। इसके उपरांत कंस वध प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी एवं अधर्मी कंस का वध कर मथुरा की प्रजा को भय और अत्याचार से मुक्ति दिलाई। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन सत्य, न्याय, करुणा और लोककल्याण का संदेश देता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। अंत में आरती के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
योजन समिति ने क्षेत्रवासियों से आगामी दिनों की कथा में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की।



