खूबसूरत दिखने वाले इन पहाड़ों का सच, जहां जाने के बाद इंसान कभी लौटकर वापस नहीं आता

killer mountains in the world: ऊंचे पहाड़ दूर से किसी स्वर्ग जैसे लगते हैं। सफेद बर्फ, शांत वातावरण और बादलों को छूती चोटियां हर किसी को आकर्षित करती हैं। मगर इस आकर्षण के पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी होती है। यहां हर कदम पर जान का जोखिम होता है। कई पर्वत ऐसे हैं जहां इंसान की यात्रा अक्सर वापसी में खत्म नहीं होती।
एडवेंचर और ट्रेकिंग का शौक रखने वालों के लिए ये जगहें सपने जैसी होती हैं। मगर यही सपने कई बार मौत में बदल जाते हैं। दुनिया की कई सबसे ऊंची चोटियां आज भी उन लोगों की आखिरी जगह बनी हुई हैं जो वहां पहुंचे थे।
8000 मीटर से ऊपर का इलाका क्यों होता है जानलेवा
- पर्वतारोहण में 8000 मीटर से ऊपर के क्षेत्र को “डेड जोन” कहा जाता है। इस ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन बहुत कम रह जाती है।
- शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
- इसका असर तेजी से होता है। सांस लेना मुश्किल हो जाता है। दिमाग ठीक से काम नहीं करता।
- कई बार लोग भ्रम की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
- यहां तापमान अक्सर माइनस 40 से माइनस 60 डिग्री तक गिर जाता है।
- ऐसी ठंड में शरीर जल्दी जम जाता है।
- तेज हवाएं और बर्फीला वातावरण शरीर को संरक्षित कर देता है।
- इसलिए कई शव वर्षों तक वैसे ही पड़े रहते हैं जैसे वे अंतिम समय में थे।
अन्नपूर्णा पर्वत पर सबसे ज्यादा खतरा
- नेपाल में स्थित अन्नपूर्णा 8091 मीटर ऊंचा पर्वत है। इसे दुनिया के सबसे जोखिम भरे पहाड़ों में गिना जाता है।
- यहां मौसम अचानक बदल जाता है। बर्फीले तूफान और एवलांच अक्सर दुर्घटना का कारण बनते हैं।
- आंकड़ों के अनुसार यहां चढ़ाई करने वाले हर तीन लोगों में से एक की जान जाने का खतरा रहता है।
K2 जिसे सैवेज माउंटेन कहा जाता है
- K2 पाकिस्तान और चीन की सीमा पर स्थित है। इसकी ऊंचाई 8611 मीटर है। इसे “सैवेज माउंटेन” भी कहा जाता है।
- यह रास्ते बहुत कठिन और खतरनाक हैं। कई हिस्से बेहद खड़ी चट्टानों और बर्फीली दरारों से भरे हैं।
- “बॉटलनेक” नाम का हिस्सा सबसे जोखिम भरा माना जाता है। यहां कई पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है।
नांगा पर्वत की कठिन चढ़ाई
- नांगा पर्वत की ऊंचाई 8126 मीटर है। यह पाकिस्तान के गिलगित बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित है।
- इसकी सबसे बड़ी समस्या इसकी खड़ी दीवार जैसी संरचना है। खासकर रूपाल फेस बहुत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
- यहां चढ़ाई के दौरान कई लोग रास्ते में ही अपनी जान गंवा चुके हैं।
कंचनजंगा का बदलता मौसम
- कंचनजंगा भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित है। इसकी ऊंचाई 8586 मीटर है और यह दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है।
- यहां मौसम बहुत तेजी से बदलता है। कभी तेज धूप और अगले ही पल भयानक तूफान आ जाता है।
- कई पर्वतारोही यहां लापता हो चुके हैं और आज तक उनका पता नहीं चला।
मैटरहॉर्न की खतरनाक बनावट
- मैटरहॉर्न यूरोप के स्विट्जरलैंड और इटली की सीमा पर स्थित है। इसकी ऊंचाई 4478 मीटर है।
- भले ही यह हिमालय की चोटियों से कम ऊंचा है मगर यह बहुत खतरनाक माना जाता है।
- इसकी पिरामिड जैसी ढलान और फिसलन भरे रास्ते हादसों का कारण बनते हैं। अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत यहां हो चुकी है।
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शव वापस लाना क्यों लगभग असंभव होता है
- बहुत लोग सोचते हैं कि आधुनिक तकनीक के बावजूद शवों को नीचे क्यों नहीं लाया जाता। इसका कारण बेहद कठिन परिस्थितियां हैं।
- ऊंचाई पर बर्फ में जमा शरीर का वजन बहुत बढ़ जाता है। यह 150 से 200 किलो तक हो सकता है। ऐसा शरीर बर्फ और चट्टानों से चिपक जाता है।
- इसे नीचे लाने के लिए कई अनुभवी पर्वतारोहियों और शेरपा टीम की जरूरत होती है। मगर डेड जोन में खुद जीवन बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती होता है। इसलिए कई बार शव वहीं छोड़ने पड़ते हैं।



